रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में वर्षों से दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत सात कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाएं नियमित करने का आदेश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने संस्थान को निर्देश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं की सेवाएं तत्काल नियमित की जाएं। यदि स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं तो नए पद सृजित कर उन्हें समायोजित किया जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की पूर्व सेवा अवधि को पेंशन, अवकाश और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए निरंतर सेवा के रूप में माना जाएगा।

शैक्षणिक योग्यता का आधार नहीं बनेगा बाधा

सुनवाई के दौरान संस्थान की ओर से कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि विशेषकर चतुर्थ श्रेणी के पदों पर दो दशक से अधिक समय तक लगातार सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को अब तकनीकी आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी संस्थान आउटसोर्सिंग का सहारा लेकर कर्मचारियों के नियमितीकरण के अधिकार को अनिश्चितकाल तक नहीं टाल सकते।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई कर्मचारी 20 वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार कार्य करता है, तो यह माना जाएगा कि उसका कार्य स्थायी प्रकृति का है। ऐसे मामलों में स्वीकृत पदों की कमी नियमितीकरण में बाधा नहीं बन सकती।

अदालत ने यह भी कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों को नियुक्त करना नियमितीकरण से बचने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। कर्मचारियों को कम वेतन देकर उनके अधिकारों से वंचित करना कानून की मंशा के विपरीत है।

वर्ष 2020 में दायर हुई थी याचिका

यह मामला वर्ष 2020 में हाईकोर्ट पहुंचा था। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के सात कर्मचारियों—सनोज कुमार शर्मा, शक्तिनाथ महतो, मो. ऐनुल अली, प्रणब हालदार, अभिषेक कुमार, अमर राम और राधिका हांसदा—ने नियमितीकरण की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 2001 से 2017 के बीच विभिन्न तिथियों से संस्थान में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2017 में संस्थान ने उन्हें सीधे नियुक्त रखने के बजाय आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्य पर रखा, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सौरव शेखर और अधिवक्ता अनुराग कुमार ने पक्ष रखा।

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