रांची : झारखंड के युवाओं के लिए कमर्शियल पायलट बनने का सपना अब साकार होने लगा है। राज्य में पहली बार कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। पहले चरण में चयनित 15 विद्यार्थियों ने एक जून 2026 से प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। वर्तमान में सभी प्रशिक्षुओं को दुमका स्थित स्टेट हैंगर में रखा गया है, जहां उन्हें विमानन क्षेत्र से जुड़ी बुनियादी और तकनीकी शिक्षा दी जा रही है।
प्रशिक्षण के शुरुआती चरण में विद्यार्थियों को ग्राउंड ट्रेनिंग के तहत विमानन नियम, सुरक्षा मानक, एयरक्राफ्ट सिस्टम, मौसम विज्ञान, नेविगेशन और अन्य आवश्यक विषयों की जानकारी दी जा रही है। इसके बाद उन्हें विमान उड़ाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके आधार पर वे आगे चलकर कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे।
चरणबद्ध तरीके से जमा करनी होगी प्रशिक्षण शुल्क
कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम की कुल फीस 34.31 लाख रुपये निर्धारित की गई है। हालांकि विद्यार्थियों को यह राशि एकमुश्त जमा नहीं करनी होगी। प्रशिक्षण की प्रगति के अनुसार छह अलग-अलग चरणों में शुल्क का भुगतान करना होगा।
प्रशिक्षण शुल्क का विवरण
| चरण | शुल्क |
|---|---|
| निबंधन के समय | 3.50 लाख रुपये |
| उड़ान प्रशिक्षण शुरू होने से पहले | 3.90 लाख रुपये |
| 20 घंटे की उड़ान से पहले | 7.00 लाख रुपये |
| 50 घंटे की उड़ान से पहले | 7.00 लाख रुपये |
| 100 घंटे की उड़ान से पहले | 7.00 लाख रुपये |
| 150 घंटे की उड़ान से पहले | 5.91 लाख रुपये |
| कुल शुल्क | 34.31 लाख रुपये |
15 मेधावी छात्रों को मिलेगा निःशुल्क प्रशिक्षण
राज्य सरकार की योजना केवल शुल्क देकर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है। दूसरे चरण में 15 और मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा, जिन्हें सरकार की ओर से पूरी तरह निःशुल्क कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं को भी विमानन क्षेत्र में करियर बनाने का अवसर प्रदान करना है। इससे राज्य के कई विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने का मौका मिलेगा।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग
प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने को लेकर झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद ने भी सुझाव दिया है। पर्षद का मानना है कि प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच की जिम्मेदारी भी उसे सौंपी जानी चाहिए।
पर्षद के अनुसार इससे चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी और पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी। फिलहाल पर्षद केवल प्रवेश परीक्षा आयोजित कर रहा है, जबकि दस्तावेजों का सत्यापन अलग स्तर पर किया जा रहा है।
एविएशन सेक्टर में करियर का नया अवसर
झारखंड में पहली बार शुरू हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से राज्य के युवाओं के लिए विमानन क्षेत्र में रोजगार और करियर की नई संभावनाएं खुली हैं। अब तक कमर्शियल पायलट बनने के इच्छुक छात्रों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।
राज्य में ही आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रशिक्षण उपलब्ध होने से समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही सरकार की निःशुल्क प्रशिक्षण योजना प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को नई उड़ान देने का काम करेगी।
