रांची : झारखंड में बस से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। डीजल की बढ़ती कीमतों, टॉल टैक्स में वृद्धि और परिचालन खर्च बढ़ने के कारण झारखंड बस ओनर एसोसिएशन ने निजी बसों के किराये में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव परिवहन विभाग को सौंप दिया है।

यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो राज्य के भीतर संचालित बसों के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के लिए चलने वाली बसों का किराया भी बढ़ जाएगा।

परिवहन सचिव को सौंपा गया प्रस्ताव

झारखंड बस ओनर एसोसिएशन के वरीय उपाध्यक्ष संजय पांडेय ने बताया कि किराया संशोधन का प्रस्ताव परिवहन सचिव को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कई मार्गों पर टॉल प्लाजा की संख्या बढ़ने से बस संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

उनका कहना है कि वर्तमान किराये पर बसों का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है, इसलिए किराये में वृद्धि आवश्यक हो गई है।

4 जून को होगी बस मालिकों की अहम बैठक

किराया बढ़ोतरी के मुद्दे पर 4 जून को बस मालिकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में 15 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो रांची से जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, गढ़वा, डालटनगंज, गुमला, सिमडेगा, चतरा समेत कई प्रमुख रूटों पर यात्रा महंगी हो जाएगी।

बस संचालकों का कहना है कि कोडरमा रूट की कुछ बसों में फिलहाल मौखिक रूप से किराया बढ़ाया गया है, जबकि अन्य रूटों के लिए बैठक के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

2008 के बाद पहली बार हो सकता है किराया संशोधन

गौरतलब है कि झारखंड में वर्ष 2008 के बाद से बस किराये में कोई औपचारिक बढ़ोतरी नहीं की गई है। दूसरी ओर बिहार सरकार पहले ही बस किराये में वृद्धि कर चुकी है। इसके कारण बिहार से आने-जाने वाली कई बसों में पहले से बढ़ा हुआ किराया लिया जा रहा है।

अब झारखंड के भीतर संचालित बस सेवाओं के किराये में भी संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है।

रांची से पटना और कोलकाता का सफर हो सकता है महंगा

बस संचालकों के अनुसार वर्तमान में रांची से पटना का सामान्य बस किराया करीब 500 रुपये है। प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होने के बाद यह बढ़कर लगभग 600 रुपये तक पहुंच सकता है।

इसी तरह रांची से कोलकाता का किराया भी करीब 600 रुपये तक हो सकता है। हालांकि किराया बसों की श्रेणी, सीट व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

यात्रियों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

यदि किराया बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो रोजाना बस से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। अब सभी की नजर 4 जून को होने वाली बस मालिकों की बैठक और परिवहन विभाग के फैसले पर टिकी हुई है।

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