रांची: झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (जेएसडीएमएस) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को सूची से हटाकर उन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया और बाद में दोबारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को भुगतान का आरोप

अजय साह ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि अगस्त 2024 में तत्कालीन मिशन निदेशक ने छह कंपनियों को कथित रूप से फर्जी बैंक गारंटी देने का दोषी मानते हुए ब्लैकलिस्ट किया था। उनका आरोप है कि अक्टूबर 2024 में मौजूदा मिशन निदेशक ने नियमों की अनदेखी करते हुए इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से हटाकर “लोकहित” का हवाला देते हुए भुगतान का आदेश जारी कर दिया।

भाजपा के अनुसार, इस दौरान संबंधित कंपनियों को करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

दोबारा ब्लैकलिस्ट करने पर उठाए सवाल

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि फर्जी बैंक गारंटी मामले में विनय चौबे के जेल जाने के बाद अगस्त 2025 में इन्हीं कंपनियों को फिर से ब्लैकलिस्ट किया गया। पार्टी का कहना है कि करीब दस महीने तक कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से बाहर रखकर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

भाजपा ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने यह भी कहा कि यदि मामले में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही श्रम विभाग के वर्तमान और पूर्व सचिव की भूमिका की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में राज्य सरकार या झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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