रामगढ़ : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी रविवार को रामगढ़ के अरगड्डा क्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने बंद पड़ी खदान में जहरीली गैस के कारण हुई चार मजदूरों की मौत के मामले का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मृतक देवा बेदिया, डबलू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष घटवार के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी तथा हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

परिजनों से बातचीत के दौरान बाबूलाल मरांडी ने हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि चार गरीब मजदूरों की असमय मौत बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि मृतकों में देवा बेदिया और डबलू बेदिया चाचा-भतीजा थे। वहीं आशीष घटवार की पत्नी गर्भवती है, जबकि डबलू बेदिया अपने पीछे पत्नी और एक बच्ची को छोड़ गए हैं। देवा बेदिया और किशोर रवानी अविवाहित थे।

“यह सिर्फ हादसा नहीं, व्यवस्था की विफलता”

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बंद खदान में एक व्यक्ति को बचाने गए चार लोगों की दम घुटने से मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बंद खदानों की सुरक्षा, घेराबंदी और लोगों की आवाजाही रोकना जिला प्रशासन तथा सीसीएल की जिम्मेदारी है, तो ऐसी घटना कैसे हुई।

उन्होंने कहा कि हादसे के बाद सामने आ रही जानकारियां और भी गंभीर हैं। यदि बचाव कार्य के नाम पर पैसे वसूलने और गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराने के आरोप सही हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने मृतक परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और न्याय सुनिश्चित करने की भी मांग की। उनके अनुसार, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

अवैध खनन पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने दावा किया कि इलाके में बड़ी संख्या में अवैध सुरंगनुमा कूप बनाकर कोयले का अवैध खनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

विस्थापन और बेरोजगारी की समस्या भी उठी

मुलाकात के दौरान ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों ने बताया कि विस्थापन के कारण उनकी जमीन चली गई है और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। उनका कहना था कि आर्थिक मजबूरियों के कारण लोग जोखिम उठाकर कोयला खनन से जुड़े कार्य करने को विवश होते हैं।

पीड़ित परिवारों ने सीसीएल से मृतकों के आश्रितों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में रोजगार और पुनर्वास की समस्याओं के समाधान की भी मांग उठाई।

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