रांची : रांची नगर निगम के करीब 450 सेवानिवृत्त कर्मियों के सामने इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अप्रैल और मई महीने की पेंशन अब तक उनके खातों में नहीं पहुंची है। वहीं दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन द्वारा बढ़ी हुई पेंशन व्यवस्था में बदलाव की तैयारी की खबरों ने पेंशनधारियों की चिंता और बढ़ा दी है।

अधिकांश पेंशनर 70 से 85 वर्ष की आयु के हैं और उनकी आजीविका, इलाज तथा घरेलू खर्च मुख्य रूप से पेंशन पर ही निर्भर है। लगातार दो महीने से भुगतान नहीं होने के कारण कई परिवार आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मिली थी राहत

वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्यकर्मियों की तर्ज पर अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन का लाभ मिलने लगा था। इससे पेंशनधारियों को काफी राहत मिली थी।

इसके बाद 21 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया था कि निगम कर्मियों को सेवानिवृत्ति की तिथि से ही पेंशन का लाभ दिया जाए। साथ ही लंबित पेंशन संबंधी बकाया राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर करने का निर्देश भी दिया गया था।

पेंशन व्यवस्था में बदलाव की आशंका

रांची नगर निगम पेंशनर्स समाज का आरोप है कि निगम प्रशासन वर्तमान पेंशन व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहा है। पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष अवध बिहारी तिवारी का कहना है कि यह कदम हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत है।

उनके अनुसार फिलहाल पेंशनधारियों को छठे वेतनमान के आधार पर पेंशन मिल रही है। यदि बिहार की पुरानी व्यवस्था के अनुरूप पेंशन निर्धारित की गई तो प्रत्येक पेंशनर को हर महीने पांच से सात हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हाईकोर्ट में दायर की गई अवमानना याचिका

पेंशनर्स समाज ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। उनका कहना है कि जब न्यायालय ने अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन देने का स्पष्ट निर्देश दिया है, तो उसे कम करने का प्रयास न्यायिक आदेश की अवहेलना माना जाएगा।

पेंशनधारियों को उम्मीद है कि न्यायालय के हस्तक्षेप से वर्तमान पेंशन व्यवस्था बरकरार रहेगी और लंबित भुगतान भी जल्द जारी होगा।

32 अधिकारियों की नियुक्ति से बढ़ा वित्तीय दबाव

जानकारी के अनुसार हाल के वर्षों में झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग से लगभग 32 अधिकारियों की नियुक्ति नगर निगम में हुई है। इनके वेतन भुगतान से निगम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ा है।

पेंशनधारियों का आरोप है कि वित्तीय दबाव को कम करने के लिए प्रशासन पेंशन मद में कटौती का रास्ता तलाश रहा है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर उन बुजुर्ग कर्मचारियों पर पड़ेगा जिन्होंने वर्षों तक निगम की सेवा की है।

दवा और घरेलू खर्च चलाना हुआ मुश्किल

दो महीने से पेंशन नहीं मिलने के कारण कई सेवानिवृत्त कर्मियों के सामने दवा, बिजली-पानी बिल, राशन और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।

कई परिवारों में पेंशन ही आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में अप्रैल और मई की पेंशन लंबित रहने से घरों का बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। पेंशनधारियों ने सरकार और नगर निगम प्रशासन से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।

समाधान की उम्मीद में पेंशनधारी

फिलहाल सभी पेंशनधारियों की नजर नगर निगम प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। एक ओर लंबित पेंशन भुगतान की मांग है, तो दूसरी ओर बढ़ी हुई पेंशन व्यवस्था को बनाए रखने की लड़ाई भी जारी है।

आने वाले दिनों में प्रशासन और अदालत के फैसले से रांची नगर निगम के सैकड़ों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।

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