रांची: झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में लगातार अनुपस्थिति और मनमाने रवैये पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियुक्ति और पदस्थापन के बावजूद निर्धारित स्थान पर योगदान नहीं देने वाले सहायक प्राध्यापकों के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित चिकित्सकों को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि वे 28 जुलाई तक अपने-अपने संस्थानों में योगदान सुनिश्चित करें। निर्धारित समय सीमा तक योगदान नहीं देने पर उनकी नियुक्ति निरस्त मानी जाएगी और भविष्य में उनका कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पहले भी जारी किया गया था नोटिस

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 18 मार्च को जारी अधिसूचना के माध्यम से सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति और पदस्थापन किया गया था। इसके बावजूद कई चिकित्सकों ने अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया।

इसके बाद 18 जून को भी विभाग ने पत्र जारी कर सभी संबंधित चिकित्सकों को तत्काल योगदान देने का निर्देश दिया था, लेकिन कई डॉक्टर बिना किसी सूचना या कारण के अनुपस्थित रहे। विभाग के अनुसार, इनमें से कुछ चिकित्सक सितंबर 2025 से ही ड्यूटी पर नहीं पहुंचे हैं।

एनएमसी के मानकों को लेकर बढ़ी चिंता

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) लगातार मेडिकल कॉलेजों में प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों की निर्धारित संख्या सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है। ऐसे में लंबे समय तक रिक्त पद रहने से मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

इसी कारण विभाग अब योगदान नहीं देने वाले सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना निरस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

इन चिकित्सकों पर हो सकती है कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग की सूची के अनुसार जिन चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है, उनमें डॉ. रोहित (जमशेदपुर), डॉ. मनीष कुमार मुंडा, डॉ. अभिषेक जायसवाल, डॉ. विनीत गर्ग (धनबाद), डॉ. कार्तिक चंद्र बेसरा (हजारीबाग), डॉ. अविनाश कुमार, डॉ. कुणाल राज, डॉ. प्रिथा रॉय (पलामू), डॉ. शिवशंकर मुंडा, डॉ. लाल बहादुर प्रसाद, डॉ. संदीप मारकुस तथा डॉ. तरुण कुमार (दुमका) शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि 28 जुलाई के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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