देवघर: श्रावणी मेला-2026 के सफल, सुरक्षित और व्यवस्थित आयोजन को लेकर बुधवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर प्रशासनिक भवन में जिला प्रशासन और तीर्थ पुरोहित समाज के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त सौरभ भुवानिया और पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष डॉ. सुरेश भारद्वाज की संयुक्त अध्यक्षता में हुई बैठक में मेले की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर संचालन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
रविवार और सोमवार को नहीं मिलेगा शीघ्रदर्शन कूपन
बैठक के दौरान उपायुक्त ने बताया कि इस वर्ष श्रावणी मेले के दौरान रविवार और सोमवार को शीघ्रदर्शन कूपन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी। इसके अलावा मेले के दौरान वीआईपी, वीवीआईपी और आउट ऑफ टर्न पूजा की कोई व्यवस्था नहीं होगी, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिल सके।
प्रशासन के अनुसार, रविवार और सोमवार को छोड़कर सप्ताह के शेष पांच दिनों में रात 8 बजे तक जलार्पण की व्यवस्था रहेगी।
श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन पर जोर
उपायुक्त सौरभ भुवानिया ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य सभी के सहयोग से श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और बेहतर दर्शन का अनुभव उपलब्ध कराना है। इसके लिए पूरे मेला क्षेत्र में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
बैठक में तीर्थ पुरोहितों ने कूपन व्यवस्था, प्रोटोकॉल के नाम पर अवैध प्रवेश, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, यातायात, सुरक्षा, सफाई व्यवस्था और मंदिर के पट खुलने-बंद होने के समय सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।
जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी और नगर आयुक्त ने इन सभी विषयों पर प्रशासन की तैयारियों और कार्ययोजना की जानकारी दी।
पुरोहितों की सुविधा का भी रखा जाएगा ध्यान
पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष डॉ. सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ तीर्थ पुरोहितों को भी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सावन से पहले शुरू होगा नया ओवरब्रिज
अनुमंडल पदाधिकारी एवं बाबा मंदिर प्रभारी रवि कुमार ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर क्षेत्र में बन रहा नया ओवरब्रिज अगले तीन दिनों में तैयार हो जाएगा और श्रावणी मेला शुरू होने से पहले इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि इस बार श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और मंदिर की परंपराओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
