रांची : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान रिम्स में कैंसर मरीजों के लिए जल्द ही PET स्कैन मशीन लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब छह महीने से चल रही टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यह सुविधा पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर संचालित होगी।
रिम्स प्रबंधन का कहना है कि मशीन शुरू होने के बाद झारखंड के हजारों कैंसर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक मरीजों को इस जांच के लिए दूसरे राज्यों या महंगे निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था।
आयुष्मान और बीपीएल मरीजों को मिलेगी मुफ्त सुविधा
रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के अनुसार आयुष्मान कार्डधारी और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को PET स्कैन की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
निजी अस्पतालों में इस जांच के लिए 25 हजार से 45 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि रिम्स में सामान्य मरीजों के लिए भी यह सुविधा काफी कम दर पर उपलब्ध कराने की योजना है। बताया जा रहा है कि लगभग पांच हजार रुपये में जांच कराई जा सकेगी।
अब दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा
फिलहाल झारखंड के किसी भी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में PET स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कैंसर मरीजों को कोलकाता, दिल्ली, भुवनेश्वर या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों खर्च होता है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण मरीज जरूरी जांच भी नहीं करा पाते। ऐसे में रिम्स में PET स्कैन सुविधा शुरू होना राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
कैंसर की पहचान में अहम भूमिका
PET स्कैन कैंसर की पहचान, उसके फैलाव और इलाज के असर का पता लगाने वाली आधुनिक जांच तकनीक मानी जाती है। इससे शरीर में कैंसर कोशिकाओं की गतिविधियों का पता चलता है।
डॉक्टरों के अनुसार शुरुआती स्तर पर कैंसर की पहचान में यह जांच काफी मददगार होती है। समय पर बीमारी पकड़ में आने से इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है और मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।
इस जांच का इस्तेमाल केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि दिल और दिमाग से जुड़ी कुछ गंभीर बीमारियों की पहचान में भी किया जाता है।
रिम्स में पहले से चल रही कई जांच सेवाएं
रिम्स में पहले से ही पीपीपी मोड पर हेल्थ मैप के जरिए एमआरआई, सीटी स्कैन और एक्स-रे जैसी रेडियोलॉजिकल जांच सेवाएं संचालित हो रही हैं। इन जांचों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर किया जाता है।
हालांकि इन सेवाओं से जुड़ी समस्याएं भी सामने आई हैं। संचालकों का कहना है कि रिम्स प्रबंधन की ओर करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है, जिसकी वजह से आयुष्मान और बीपीएल मरीजों को मिलने वाली मुफ्त जांच सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
सदर अस्पताल में भी भुगतान की समस्या
रांची सदर अस्पताल में भी पीपीपी मोड पर एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। वहां भी भुगतान में देरी के कारण कई बार गरीब मरीजों की मुफ्त जांच व्यवस्था प्रभावित होती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिम्स में शुरू होने वाली PET स्कैन सेवा को सुचारु रूप से चलाने के लिए समय पर भुगतान और मजबूत संचालन व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।
विशेषज्ञों ने दी व्यवस्था मजबूत करने की सलाह
आईएमए सचिव डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि सरकार को केवल मशीन लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसकी संचालन व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी ताकि गरीब मरीजों को लगातार लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि भुगतान प्रणाली पारदर्शी और समयबद्ध होने पर ही यह सुविधा लंबे समय तक बेहतर तरीके से संचालित हो पाएगी।
झारखंड में तेजी से बढ़ रहे कैंसर मरीज
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रोहित झा के अनुसार झारखंड में हर साल करीब 35 से 40 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। तंबाकू सेवन, प्रदूषण, खराब जीवनशैली और देर से जांच इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
राज्य में मुंह, फेफड़ा, स्तन और गर्भाशय कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच से कैंसर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
रिम्स और सदर अस्पताल में उपलब्ध हैं इलाज की सुविधाएं
रिम्स में कैंसर मरीजों के लिए मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। यहां हर महीने लगभग 2500 से 3000 मरीज इलाज और परामर्श के लिए पहुंचते हैं।
वहीं रांची सदर अस्पताल में स्तन कैंसर, मुंह के कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच और स्क्रीनिंग की सुविधा दी जा रही है। यहां हर महीने करीब 400 से 600 मरीज कैंसर संबंधी जांच के लिए पहुंचते हैं।
