नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र 2026 के दूसरे चरण में एक ओर जहां अहम विधायी कार्यवाही जारी है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी केंद्र सरकार की नजर बनी हुई है। लोकसभा में ट्रांसजेंडर बिल पारित होने के साथ सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
ट्रांसजेंडर बिल से मिलेगा अधिकारों को बल
लोकसभा से ट्रांसजेंडर बिल पारित होने के बाद सरकार ने इसे सामाजिक समावेशन की दिशा में बड़ा कदम बताया है। सामाजिक न्याय मंत्री ने कहा कि इस कानून से ट्रांसजेंडर समुदाय को कानूनी स्पष्टता मिलेगी और उनके अधिकारों को मजबूती मिलेगी। लंबे समय से लंबित इस विधेयक के पारित होने से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार सतर्क
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत सभी पक्षों के बीच संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार संपर्क बनाए हुए है।
प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।
ऊर्जा और व्यापार पर असर की आशंका
सरकार ने सदन में स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना है। होरमुज जलसंधि में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार के लिए भी चुनौती बन सकता है।
25 मार्च को सर्वदलीय बैठक
मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने 25 मार्च 2026 को संसद भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
बैठक का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों को मौजूदा स्थिति से अवगत कराना और एक साझा राष्ट्रीय रणनीति तैयार करना है।
सात एंपावर्ड ग्रुप कर रहे निगरानी
सरकार ने संकट से निपटने के लिए सात एंपावर्ड ग्रुप गठित किए हैं, जो एलपीजी, कच्चे तेल और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर नजर रख रहे हैं। साथ ही खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित निकासी की तैयारी भी की जा रही है।
सरकार का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार त्वरित निर्णय लिए जाएंगे।
