सरायकेला: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मृतका की पहचान विनीता बानरा के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है।
भाजपा का धरना-प्रदर्शन, सरकार पर निशाना
घटना के विरोध में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। धरने का नेतृत्व जिला अध्यक्ष हरे कृष्ण प्रधान ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश की गई, जो इस दर्दनाक घटना की मुख्य वजह बनी। उनका कहना है कि यदि अस्पताल में पर्याप्त संसाधन होते, तो मां और नवजात की जान बचाई जा सकती थी।
गीता कोड़ा का सरकार पर तीखा हमला
धरने में शामिल पूर्व सांसद और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष गीता कोड़ा ने राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और स्वास्थ्य मंत्री केवल औपचारिकताएं निभा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं।
“संस्थागत हत्या” का आरोप
भाजपा नेताओं ने इस घटना को केवल लापरवाही नहीं बल्कि “संस्थागत हत्या” करार दिया है। प्रदेश मंत्री शैलेंद्र कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा रही है, जो पीड़ित परिवार के साथ अन्याय है।
भाजपा की प्रमुख मांगें
भाजपा ने राज्य सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं—
- मृतका के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए
- मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
जिला अध्यक्ष हरे कृष्ण प्रधान ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने चाईबासा सदर अस्पताल में हुई पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा और जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग दोहराई। फिलहाल, इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

