नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में सत्ता के साथ अक्सर सरकारी तामझाम, सुरक्षा व्यवस्था और बड़े काफिलों की चर्चा होती है। हालांकि देश के राजनीतिक इतिहास में कुछ ऐसे नेता भी रहे हैं, जिन्होंने अपने सादगीपूर्ण जीवन से अलग पहचान बनाई। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव का नाम भी ऐसे ही नेताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री बनने के लिए रिक्शे से राजभवन पहुंचने और पद छोड़ने के बाद भी उसी सादगी के साथ घर लौटने की उनकी कहानी आज भी चर्चा में रहती है।

एक साधारण मुलाकात ने बदल दी राजनीतिक किस्मत

वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद देश में जनता पार्टी की सरकार बनी और उत्तर प्रदेश में नए मुख्यमंत्री की तलाश शुरू हुई। उस समय कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में थे।

इसी दौरान सांसद राम नरेश यादव अपने क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुलवाने के संबंध में आवेदन लेकर तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और समाजवादी नेता राजनारायण से मिलने पहुंचे। विभिन्न ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इसी मुलाकात के दौरान उनके नाम पर मुख्यमंत्री पद के लिए सहमति बनी।

गोपनीय रखा गया था मुख्यमंत्री का नाम

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री के नाम को अंतिम समय तक बेहद गोपनीय रखा गया था। जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद राम नरेश यादव को लखनऊ जाने के लिए रेल टिकट और राज्यपाल को सौंपने हेतु एक सीलबंद पत्र दिया गया। उन्हें निर्देश दिया गया कि राजभवन पहुंचने तक इस निर्णय की जानकारी किसी से साझा न करें।

रिक्शे से पहुंचे थे राजभवन

लखनऊ पहुंचने के बाद राम नरेश यादव ने किसी सरकारी वाहन का उपयोग नहीं किया, बल्कि चारबाग रेलवे स्टेशन से एक सामान्य रिक्शा लेकर राजभवन के लिए रवाना हुए। इसी दौरान आकाशवाणी के एक अधिकारी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने की बधाई दी।

कई ऐतिहासिक संस्मरणों में उल्लेख मिलता है कि उन्होंने सरकारी वाहन का प्रस्ताव भी विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया और रिक्शे से ही राजभवन पहुंचे। बाद में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

इस्तीफा देने के बाद भी नहीं बदली सादगी

राम नरेश यादव ने वर्ष 1979 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं किया। कहा जाता है कि उन्होंने राजभवन से निकलकर फिर रिक्शे से ही अपने घर लौटना पसंद किया। इसी कारण उनकी सादगी भारतीय राजनीति में एक मिसाल के रूप में याद की जाती है।

लंबे राजनीतिक जीवन में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां

मुख्यमंत्री पद के अलावा राम नरेश यादव ने विभिन्न संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर भी कार्य किया। वे बाद में राज्यसभा के सदस्य रहे तथा मध्य प्रदेश के राज्यपाल और छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त प्रभार वाले राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

हालांकि उनके सार्वजनिक जीवन के अंतिम वर्षों में व्यापम प्रकरण से जुड़े आरोप भी सामने आए थे। यह मामला अलग कानूनी प्रक्रिया का विषय रहा। इसके बावजूद भारतीय राजनीति में उनकी पहचान आज भी उनकी सादगी, सहज जीवनशैली और जनसेवा की भावना के लिए की जाती है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version