गुमला: झारखंड के गुमला जिले में एलपीजी गैस संकट का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ शादी-ब्याह जैसे आयोजनों पर भी साफ नजर आने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को भोजन बनाने के लिए वैकल्पिक उपाय तलाशने पड़ रहे हैं।

शादी से पहले ‘परमिट’ की चिंता

जिले के दुंदुरिया गांव निवासी अरुण लकड़ा की शादी 24 अप्रैल को तय है, लेकिन गैस की कमी के कारण उनके सामने सबसे बड़ी समस्या खाना बनाने की खड़ी हो गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें थाना प्रभारी को आवेदन देकर जंगल से लकड़ी लाने की अनुमति मांगनी पड़ी।

अपने आवेदन में अरुण ने लिखा है कि शादी के आयोजन में चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी की आवश्यकता है, इसलिए उन्हें अनुमति प्रदान की जाए।

बदली शादी की परंपरा

एक समय था जब गांवों में लकड़ी के चूल्हों पर ही शादी का भोजन तैयार होता था, लेकिन एलपीजी गैस के प्रचलन के बाद यह परंपरा बदल गई थी। अब गैस संकट के कारण लोग फिर से पुराने तरीकों की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

नियम बने नई परेशानी

जंगल से लकड़ी काटना नियमों के तहत प्रतिबंधित है, ऐसे में लोगों को प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ रही है। इससे शादी की तैयारियों में एक नया चरण जुड़ गया है—परमिट लेना।

अनोखे तरीके से विरोध

गैस संकट के खिलाफ लोगों का गुस्सा भी अलग अंदाज में सामने आ रहा है। मिशन चौक पर एक युवक ने गैस सिलेंडर पर तख्ती लगाकर “कब आओगे तुम?” लिखकर सड़क पर रख दिया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

व्यापारियों ने जताई चिंता

चेंबर ऑफ कॉमर्स के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने कहा कि एलपीजी सप्लाई में लगातार गड़बड़ी के कारण शादी वाले घरों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी, तो शादी-ब्याह के आयोजन और अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

गुमला में गैस संकट ने सामाजिक आयोजनों की पारंपरिक व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है और लोगों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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