रांची: राजधानी रांची में घरों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग नहीं देने की आदत शहर की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। रांची नगर निगम प्रतिदिन लगभग 500 से 600 टन ठोस कचरा एकत्र कर रहा है, लेकिन झिरी स्थित बायो-मीथेनेशन प्लांट को उसकी क्षमता के अनुरूप पर्याप्त गीला कचरा नहीं मिल पा रहा है। इसका असर प्लांट के संचालन और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है।

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, प्लांट को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए प्रतिदिन लगभग 150 टन अलग किया हुआ गीला कचरा चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल 80 टन ही उपलब्ध हो पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण अधिकांश घरों से मिश्रित कचरा दिया जाना है, जिससे वैज्ञानिक तरीके से कचरे का प्रसंस्करण प्रभावित हो रहा है।

स्रोत पर कचरा अलग नहीं होना सबसे बड़ी चुनौती

अपर नगर आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण नहीं होना सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि बड़े कचरा उत्पादक संस्थान तो अलग-अलग कचरा दे रहे हैं, लेकिन अधिकांश घरों से अब भी मिश्रित कचरा ही आ रहा है। कई बार गीले कचरे को सूखे कचरे के नीचे छिपाकर दे दिया जाता है, जिससे पूरा कचरा प्रसंस्करण के लिए अनुपयोगी हो जाता है।

इस लापरवाही के कारण बड़ी मात्रा में कचरा बायोगैस और जैविक खाद में परिवर्तित होने के बजाय सीधे झिरी स्थित लगभग 40 एकड़ में फैले डंपिंग यार्ड में भेजना पड़ रहा है।

जागरूकता अभियान चला रहे हैं वार्ड पार्षद

स्थिति में सुधार लाने के लिए नगर निगम और वार्ड पार्षदों ने लोगों को जागरूक करने का अभियान शुरू किया है। वार्ड-3 की पार्षद बसंती लकड़ा ने बताया कि सभी वार्डों में नागरिकों को घर से ही गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनका कहना है कि लोगों की सक्रिय भागीदारी के बिना शहर की वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना को सफल बनाना संभव नहीं है।

चार अलग-अलग डिब्बों में रखना होगा कचरा

नगर निगम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत सख्ती भी शुरू कर दी है। शहर के 209 बल्क वेस्ट जेनरेटरों में से 191 का ऑनलाइन पंजीकरण किया जा चुका है, ताकि कचरे की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।

नए प्रावधानों के अनुसार, घरों, सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अब चार अलग-अलग डिब्बों में कचरा रखना अनिवार्य होगा। कचरा संग्रहण वाहनों को भी उन्नत किया जा रहा है, जिनमें गीले और सूखे कचरे के अलावा सैनिटरी कचरे के लिए लाल रंग तथा घरेलू खतरनाक कचरे के लिए काले रंग के अलग कंटेनर उपलब्ध कराए जाएंगे।

नगर निगम का मानना है कि यदि नागरिक स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करें, तो बायो-मीथेनेशन प्लांट पूरी क्षमता से संचालित होगा और शहर में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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