रांची: राजधानी के सदर अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से स्थापित हेल्थ इन्फॉर्मेशन कियोस्क अब शोपीस बनकर रह गए हैं। अस्पताल में लगाए गए डिजिटल कियोस्क से मरीजों को न तो डॉक्टरों की उपलब्धता की जानकारी मिल रही है और न ही दवाओं के स्टॉक का अपडेट। इससे खासकर दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को बेहतर और त्वरित सूचना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन डिजिटल कियोस्क की स्थापना की थी। योजना यह थी कि मरीज एक क्लिक में डॉक्टरों की ड्यूटी, ओपीडी की जानकारी और दवाओं की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही है।
शोपीस बनकर रह गईं डिजिटल मशीनें
अस्पताल परिसर में स्थापित कई कियोस्क या तो बंद पड़े हैं या फिर उनमें आवश्यक जानकारी अपडेट नहीं की जा रही है। कुछ मशीनें चालू हैं, लेकिन उनमें भी अधूरी और पुरानी जानकारी दिखाई दे रही है। ऐसे में मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि जब इन मशीनों का नियमित रखरखाव और डेटा अपडेट नहीं किया जा सकता, तो लाखों रुपये खर्च कर इन्हें स्थापित करने का औचित्य क्या है।
डॉक्टरों के रोस्टर की जानकारी नहीं
सदर अस्पताल में मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी डॉक्टरों की ड्यूटी से जुड़ी जानकारी का अभाव है। अस्पताल में न तो कियोस्क पर और न ही नोटिस बोर्ड पर डॉक्टरों का स्पष्ट रोस्टर उपलब्ध है।
इसके कारण मरीजों को यह पता लगाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है कि कौन डॉक्टर किस दिन और किस ओपीडी में उपलब्ध रहेगा। कई मामलों में मरीज जिस डॉक्टर से पहले इलाज करवा चुके होते हैं, उनसे दोबारा परामर्श लेने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है।
दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी भ्रम
मरीजों को अस्पताल के दवा काउंटर पर उपलब्ध दवाओं की अद्यतन जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। कियोस्क में दवाओं की सूची तो प्रदर्शित है, लेकिन बताया जा रहा है कि लंबे समय से इसमें कोई अपडेट नहीं किया गया है।
ऐसे में मरीजों को यह जानकारी नहीं मिलती कि कौन-सी दवा अस्पताल में उपलब्ध है और कौन-सी खत्म हो चुकी है। परिणामस्वरूप कई मरीजों को दवा काउंटर और पूछताछ केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
गरीब और ग्रामीण मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
कियोस्क व्यवस्था के विफल होने का सबसे अधिक असर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। जानकारी के अभाव में कई मरीज सुबह से घंटों कतार में खड़े रहते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि संबंधित डॉक्टर उस दिन ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं हैं।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सूचना तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि लोगों का समय और पैसा दोनों बच सके। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से हेल्थ इन्फॉर्मेशन कियोस्क को जल्द दुरुस्त कर नियमित रूप से अपडेट करने की मांग की है।

