रांची में गैस सिलिंडर होम डिलीवरी में अनियमितता का खुलासा, इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी संचालक के खिलाफ पुलिस जांच में आरोप सही पाए गए
रांची: राजधानी रांची में गैस सिलिंडर वितरण को लेकर सामने आए एक मामले में पुलिस जांच के दौरान गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। चुटिया थाना में दर्ज प्राथमिकी की जांच में यह पाया गया है कि ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर की होम डिलीवरी नहीं की जा रही थी। मामले में इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी के संचालक रवि भट्ट को पुलिस ने जिम्मेदार माना है।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और गैस आपूर्ति को लेकर उत्पन्न चुनौतियों के बीच सरकार ने घरेलू गैस वितरण व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत गैस एजेंसियों को उपभोक्ताओं के पंजीकृत पते पर निर्धारित समय सीमा के भीतर सिलिंडर की होम डिलीवरी सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था। आरोप है कि इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।
गवाहों के बयान में सामने आई अनियमितता
पुलिस जांच के दौरान दो गवाहों रवि सिंह और गंजा तिर्की के बयान दर्ज किए गए। दोनों ने अपने बयान में बताया कि ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद उपभोक्ताओं को घर तक गैस सिलिंडर नहीं पहुंचाया जाता था।
जांच में सामने आया कि निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद एजेंसी के कर्मचारी उपभोक्ताओं को फोन कर यह जानकारी देते थे कि उनका डीएसी नंबर समाप्त हो गया है। इसके बाद ग्राहकों को एजेंसी के वितरण केंद्र से स्वयं गैस सिलिंडर लेने के लिए कहा जाता था।
इस व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता था और गैस प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता था।
इंडियन ऑयल के नियमों का उल्लंघन
पुलिस जांच में यह भी पाया गया कि इंडियन ऑयल द्वारा उपभोक्ताओं के घर तक गैस सिलिंडर पहुंचाने की स्पष्ट व्यवस्था निर्धारित की गई है। एजेंसी संचालक को इस नियम से किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई थी। इसके बावजूद होम डिलीवरी के बजाय वितरण केंद्र से गैस लेने के लिए उपभोक्ताओं को बाध्य किया जा रहा था।
चुटिया थाना में दर्ज हुआ था मामला
इस मामले में 23 मई 2026 को चुटिया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह केस अरगोड़ा सर्किल इंस्पेक्टर अरविंद कुमार उपाध्याय की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
शिकायत में अमरावती कॉलोनी के निवासियों से मिली जानकारी के आधार पर आरोप लगाया गया था कि डीएसी नंबर जारी होने के बावजूद 40 दिनों तक गैस सिलिंडर की होम डिलीवरी नहीं की जा रही थी।
प्राथमिकी में यह भी कहा गया था कि एजेंसी की ओर से प्रत्येक बुधवार और रविवार को प्वाइंट आधारित वितरण प्रणाली अपनाई जा रही थी, जिसके तहत लोगों को लाइन में लगकर गैस सिलिंडर प्राप्त करना पड़ता था।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज है केस
मामले में सरकारी निर्देशों के उल्लंघन और आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अनियमितता की पुष्टि होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

