रांची : झारखंड सरकार की मंईयां सम्मान योजना में लाभार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 6 जनवरी 2025 को पहली बार योजना के तहत 56.61 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 1,415.44 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की थी। इसके बाद अक्टूबर 2025 तक लाभार्थियों की संख्या घटकर 51.04 लाख रह गई। अब नए वित्तीय वर्ष में चल रहे व्यापक सत्यापन अभियान के बाद यह संख्या 50 लाख से भी नीचे पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
फर्जी और अपात्र लाभार्थियों की हो रही पहचान
सरकारी अधिकारियों के अनुसार राज्य के सभी जिलों में लाभार्थियों का सत्यापन अभियान जारी है। इस दौरान फर्जी लाभार्थियों की पहचान की जा रही है। साथ ही 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी महिलाओं और अन्य अपात्र लाभार्थियों के नाम भी सूची से हटाए जा रहे हैं।
अनुमान है कि इस चरण में एक लाख से अधिक लाभार्थियों के नाम सूची से हट सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी भी जिले ने अपनी अंतिम सत्यापन रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन महिलाओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, उनकी जगह फिलहाल नए पात्र आवेदकों को शामिल नहीं किया जा रहा है।
इन आधारों पर हो रहा है सत्यापन
सत्यापन के दौरान यह जांच की जा रही है कि लाभार्थी झारखंड की स्थायी निवासी है या नहीं, उसकी आयु 18 से 50 वर्ष के बीच है या नहीं तथा परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक तो नहीं है।
इसके अलावा राशन कार्ड का भी मिलान किया जा रहा है। योजना का लाभ लेने के लिए पीला, गुलाबी, हरा या सफेद राशन कार्ड होना अनिवार्य है।
किन महिलाओं को माना जा रहा है अपात्र
सरकार के अनुसार जिन परिवारों में केंद्र या राज्य सरकार का कोई कर्मचारी है, आयकर का भुगतान किया जाता है अथवा परिवार की महिला पहले से किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ ले रही है, उन्हें मंईयां सम्मान योजना के लिए अपात्र माना जा रहा है।
सत्यापन के कारण कई जिलों में भुगतान प्रभावित
सत्यापन प्रक्रिया के चलते कई जिलों में योजना की किस्त का भुगतान प्रभावित हुआ है। कुछ जिलों में अप्रैल और मई की पूरी राशि अब तक जारी नहीं हो सकी है। विभाग का कहना है कि जिन जिलों में सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो रही है, वहां पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से राशि भेजी जा रही है।
सरकार का दावा है कि जुलाई के दौरान सभी पात्र लाभार्थियों के खातों में लंबित राशि का भुगतान पूरा कर दिया जाएगा।
31 मई तक सत्यापन नहीं कराने वालों की किस्त रुकी
योजना में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद सरकार ने सभी लाभार्थियों के लिए सत्यापन अनिवार्य कर दिया था। जिन महिलाओं ने 31 मई 2026 तक अपना सत्यापन नहीं कराया, उनके खातों में योजना की राशि भेजना रोक दिया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ पाने के लिए बैंक खाते का आधार से जुड़ा होना अनिवार्य है, क्योंकि भुगतान पूरी तरह आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है।

