कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा और भावनात्मक मोड़ देखने को मिला, जब नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अपने समर्थकों को “जय श्री राम” के नारे लगाने से रोक दिया।
कोलकाता के ऐतिहासिक जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी पहुंचे मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अब वे केवल किसी एक दल या विचारधारा के नेता नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री हैं।
टैगोर को दी श्रद्धांजलि
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बाद शुभेंदु अधिकारी सीधे जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी पहुंचे। यहां उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की 166वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को नमन किया।
इसी दौरान वहां मौजूद समर्थकों ने “जय श्री राम” के नारे लगाने शुरू कर दिए। मुख्यमंत्री ने तुरंत हाथ जोड़कर समर्थकों को शांत कराया और कहा कि यह समय राजनीतिक नारेबाजी का नहीं है।
“मैं अब सभी का मुख्यमंत्री हूं”
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यहां केवल कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का सम्मान होना चाहिए। उनका यह बयान मौके पर मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया।
उन्होंने कहा, “मैं अब सभी का मुख्यमंत्री हूं। बंगाल ने बहुत राजनीतिक संघर्ष और विभाजन देख लिया है। अब समय राज्य के विकास, शिक्षा, संस्कृति और रोजगार पर ध्यान देने का है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी खुद की नई और संतुलित राजनीतिक छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
विकास और पुनर्निर्माण पर जोर
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल को अब राजनीतिक टकराव नहीं, बल्कि विकास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और औद्योगिक विकास को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, “आइए, हम सब मिलकर बंगाल का पुनर्निर्माण करें। अब समय आगे बढ़ने का है।”
विश्वविद्यालय के दिनों को किया याद
जोड़ासांको दौरे के बाद मुख्यमंत्री ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कुलपति से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन की यादें साझा कीं और विश्वविद्यालय परिसर में कुछ समय बिताया।
शुभेंदु अधिकारी के इस बदले हुए राजनीतिक अंदाज और संयमित बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और कई लोग इसे “नए बंगाल की नई राजनीति” के रूप में देख रहे हैं।

