रांची : झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सोमवार को उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। नामांकन के दौरान भाजपा के कई विधायक उनके साथ विधानसभा पहुंचे। झरिया की भाजपा विधायक रागिनी सिंह समेत पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी ने नथवाणी की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा के समर्थन के संकेत और मजबूत कर दिए हैं।
परिमल नथवाणी इससे पहले वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में वह आंध्र प्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर राजनीतिक समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।
भाजपा और सहयोगी दलों के समर्थन से मजबूत स्थिति
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा ने इस बार राज्यसभा चुनाव में अपना आधिकारिक उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। पार्टी की रणनीति निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी का समर्थन करने की बताई जा रही है। भाजपा के साथ-साथ जदयू, लोजपा और आजसू के विधायकों को भी उनके प्रस्तावक बनने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए घटक दलों का समर्थन मिलने से नथवाणी की दावेदारी काफी मजबूत हो गई है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का मुकाबला और अधिक रोचक हो सकता है।
हेमंत सोरेन से मुलाकात बनी चर्चा का विषय
नामांकन से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिमल नथवाणी की मुलाकात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि दोनों पक्षों ने इसे महज शिष्टाचार भेंट बताया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नथवाणी के प्रस्तावक की भूमिका में नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नथवाणी के प्रति झामुमो के कुछ नेताओं और विधायकों में सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है। इसके पीछे उनका पूर्व कार्यकाल और झारखंड के विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव पर टिकी राजनीतिक नजरें
नामांकन प्रक्रिया के बाद अब राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। सभी दल अपने-अपने संख्या बल और चुनावी रणनीति को लेकर सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में समर्थन, संभावित क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर और तेज हो सकता है।
झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव इस बार खासा दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि कई राजनीतिक दलों की रणनीति और समीकरण चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

