Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल की दो शिक्षिकाओं सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को बड़ी राहत देते हुए उनकी नियुक्ति को वैध ठहराया है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने राज्य सरकार और रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) द्वारा नियुक्ति मंजूरी से इनकार करने के फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दोनों शिक्षिकाओं की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई है, इसलिए उन्हें विद्यालय में सेवा जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।
2023 में हुई नियुक्ति, बाद में अटक गई प्रक्रिया
मामला डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल से जुड़ा है, जो एक भाषाई अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान है। विद्यालय में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 29 अप्रैल 2023 को विज्ञापन जारी किया गया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 12 मई 2023 को सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को नियुक्ति पत्र दिया गया तथा दोनों ने 17 मई 2023 को योगदान भी दे दिया।
हालांकि, 30 जुलाई 2024 को जिला शिक्षा अधीक्षक ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों शिक्षिकाओं ने न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
डीएसई ने उठाए थे दो प्रमुख सवाल
जिला शिक्षा अधीक्षक ने नियुक्ति मंजूरी रोकने के पीछे दो कारण बताए थे। पहला, विद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान मानने से इनकार करते हुए आरक्षण नीति के अनुपालन पर सवाल उठाया गया। दूसरा, दोनों शिक्षिकाओं की आयु निर्धारित सीमा से अधिक बताई गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वर्ष 2009 के आरटीआई दस्तावेज और पूर्व न्यायिक आदेश प्रस्तुत किए गए, जिनमें विद्यालय को भाषाई अल्पसंख्यक संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त होने का उल्लेख था। रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि विद्यालय वास्तव में अल्पसंख्यक संस्थान है और इस आधार पर नियुक्ति को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
आयु सीमा पर भी कोर्ट ने दिया स्पष्ट फैसला
अदालत ने झारखंड प्राथमिक विद्यालय सहायक शिक्षक नियमावली, 2022 का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया नहीं होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट दी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि पिछली भर्ती 2012 में हुई थी, जबकि अगली नियुक्ति प्रक्रिया 2023 में आयोजित की गई।
अदालत ने कहा कि 2023 के विज्ञापन में महिला अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष निर्धारित थी। ऐसे में दोनों शिक्षिकाएं पात्रता की शर्तों को पूरा करती हैं।
चयन प्रक्रिया के नियम बीच में नहीं बदले जा सकते
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी चयन प्रक्रिया के प्रारंभ होने के बाद उसके नियमों और शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता। यदि विज्ञापन में विद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान बताया गया था और उसी आधार पर पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई, तो बाद में अलग व्याख्या करना उचित नहीं है।
अदालत ने जिला शिक्षा अधीक्षक के फैसले को मनमाना बताते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के कारण दोनों शिक्षिकाओं को अनावश्यक रूप से न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
30 दिनों के भीतर नियुक्ति मंजूरी का आदेश
हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधीक्षक को निर्देश दिया है कि 30 दिनों के भीतर दोनों शिक्षिकाओं की नियुक्ति को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की जाए। साथ ही 17 मई 2023 से उन्हें सेवा लाभ और नियमित वेतन देने का आदेश भी जारी किया गया है।
हालांकि, अदालत ने पूर्व अवधि के बकाया वेतन के भुगतान की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा कोर्ट ने राज्य के सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में अल्पसंख्यक विद्यालयों में नियुक्ति संबंधी मामलों का निपटारा 60 दिनों के भीतर किया जाए, ताकि अनावश्यक विवाद और देरी से बचा जा सके।

