नई दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 77,821 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। हालांकि सरकार और उद्योग जगत का कहना है कि यह कमाई किसी असामान्य या संकटजनित लाभ का परिणाम नहीं, बल्कि सामान्य लाभप्रदता की वापसी है।
सरकारी और उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने मिलकर यह लाभ दर्ज किया है।
20 लाख करोड़ रुपये के कारोबार पर तीन से चार प्रतिशत मुनाफा
तीनों कंपनियों का संयुक्त कारोबार करीब 20 लाख करोड़ रुपये का रहा। इस हिसाब से उनका शुद्ध लाभ लगभग तीन से चार प्रतिशत बैठता है, जिसे वैश्विक तेल शोधन उद्योग में सामान्य माना जाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि बड़े रिफाइनिंग उद्योग में एक से तीन प्रतिशत का परिचालन मुनाफा सामान्य होता है और यही राशि रिफाइनरी विस्तार, पूंजीगत निवेश और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में उपयोग की जाती है।
पिछले साल कम था मुनाफा
विपक्षी दलों ने वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में मुनाफे में 130 प्रतिशत वृद्धि को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनियों का लाभ घटकर 33,602 करोड़ रुपये रह गया था।
इसकी मुख्य वजह यह थी कि तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए करीब 40,434 करोड़ रुपये का नुकसान अपने ऊपर लिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस एकमुश्त बोझ को हटाकर देखा जाए तो वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई वित्त वर्ष 2023-24 के 80,986 करोड़ रुपये के लाभ के करीब है।
रिफाइनरी विस्तार पर होगा बड़ा निवेश
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार भारत की तेल कंपनियां 2030 तक देश की शोधन क्षमता को 31 करोड़ टन प्रति वर्ष से अधिक तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं।
बताया गया कि एक बड़े रिफाइनरी विस्तार कार्यक्रम पर 50 हजार करोड़ से 60 हजार करोड़ रुपये तक खर्च हो सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए स्थिर लाभ जरूरी है।
पश्चिम एशिया संकट का असर सीमित
कंपनियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और पश्चिम एशिया संघर्ष का असर वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों पर सीमित रहा।
रिफाइनरियां उस समय पहले से खरीदे गए 50 से 60 दिन के कच्चे तेल भंडार का उपयोग कर रही थीं। हालांकि कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों, माल ढुलाई शुल्क और बीमा प्रीमियम का असर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों में देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल कीमतों में सीमित बढ़ोतरी का दावा
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की हालिया कीमत वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी पड़ोसी देशों की तुलना में कम रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार संकट के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब आठ से नौ प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि कई पड़ोसी देशों में यह वृद्धि 20 से 67 प्रतिशत तक रही।
सरकार ने यह भी बताया कि 27 मार्च 2026 से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई।
अधिकारियों के अनुसार 2021 से अब तक पेट्रोल पर कुल 23 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 26 रुपये प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क राहत दी जा चुकी है।
सरकार को भी मिलता है बड़ा हिस्सा
सरकार का कहना है कि तेल कंपनियों के मुनाफे का लगभग आधा हिस्सा लाभांश और करों के रूप में सरकारी खजाने में वापस आता है।
इस राशि का उपयोग राजमार्ग, रेलवे और मेट्रो जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाता है, जबकि बाकी धनराशि ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनरी क्षमता विस्तार में निवेश होती है।
