रांची: रांची स्थित झारखंड विधानसभा में नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) के सफल संचालन और विधायी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस बनाकर डिजिटल सदन की दिशा में आगे बढ़ाना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि NeVA के माध्यम से सदन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति आएगी, साथ ही कागजों की खपत में भी भारी कमी होगी। इस अवसर पर विधायकों के बीच टैबलेट का भी वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अब विधायकों को देर रात प्रश्न डालने या कागजी प्रक्रिया के लिए विधानसभा आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी जानकारियां अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक क्लिक में उपलब्ध होंगी, जिससे सदस्यों और कर्मचारियों दोनों को सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “डिजिटल झारखंड” के लक्ष्य की दिशा में यह बड़ा कदम है। बजट सत्र में NeVA का आंशिक उपयोग किया जाएगा और मानसून सत्र से विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 20 राज्यों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस तकनीकी पहल का स्वागत करते हुए कहा कि डिजिटल व्यवस्था के साथ यह भी जरूरी है कि विपक्ष और जनमुद्दों को सदन में पर्याप्त स्थान मिले। उन्होंने विधायकों के लिए व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि “वन नेशन, वन एप्लिकेशन” के तहत झारखंड विधानसभा आधुनिक विधानसभाओं की श्रेणी में शामिल होगी। इससे विधायी कार्यों की दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
यह कार्यशाला विधायकों और विधानसभा कर्मियों को NeVA मोबाइल ऐप और पोर्टल के उपयोग का प्रशिक्षण देने के लिए आयोजित की गई थी, ताकि 18 फरवरी 2026 से प्रस्तावित बजट सत्र में इसका प्रभावी उपयोग किया जा सके।

