रांची: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा हाल ही में घोषित 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर पुराने निवेश समझौतों को नए निवेश के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को भ्रमित करने के लिए पहले से घोषित निवेश प्रस्तावों को नए पैकेज के रूप में पेश कर रही है।
प्रतुल शाह देव ने कहा कि राज्य सरकार फरवरी 2026 में दावोस और यूनाइटेड किंगडम यात्रा के बाद 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की घोषणा कर चुकी थी। उनका आरोप है कि दिल्ली में हाल में जिन निवेश प्रस्तावों की घोषणा की गई, उनमें अधिकांश वही कंपनियां और लगभग वही निवेश राशि शामिल हैं, जिनका पहले भी उल्लेख किया जा चुका है।
इन कंपनियों के निवेश प्रस्तावों का किया जिक्र
भाजपा नेता ने कहा कि हालिया निवेश घोषणाओं में जिंदल स्टील लिमिटेड (40,000 करोड़ रुपये), जिंदल न्यूक्लियर पावर (30,000 करोड़ रुपये), रुंगटा संस (10,000 करोड़ रुपये), रुंगटा माइंस (3,000 करोड़ रुपये), टाटा स्टील हिसारना परियोजना (7,000 करोड़ रुपये), अमलगम स्टील एंड पावर (4,980 करोड़ रुपये), टाटा स्टील टिन प्लेट विस्तार (2,600 करोड़ रुपये), अंबुजा सीमेंट (1,000 करोड़ रुपये) और जिंदल रिन्यूएबल्स (650 करोड़ रुपये) जैसी कंपनियों के प्रस्ताव शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि यही कंपनियां और लगभग यही निवेश राशि पहले घोषित निवेश प्रस्तावों में भी शामिल थीं।
सरकार से मांगा जवाब
प्रतुल शाह देव ने कहा कि यदि ये वास्तव में नए समझौता ज्ञापन (एमओयू) हैं तो सरकार स्पष्ट करे कि पहले किए गए एमओयू की वर्तमान स्थिति क्या है। वहीं यदि ये पुराने निवेश प्रस्ताव हैं, तो उन्हें दोबारा नए निवेश के रूप में क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि पिछले छह महीनों में इन परियोजनाओं पर कितना वास्तविक निवेश हुआ, कितनी भूमि आवंटित की गई, कितनी परियोजनाओं का निर्माण शुरू हुआ और स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिला।
न्यूक्लियर पावर परियोजना पर भी उठाए सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने विशेष रूप से 30,000 करोड़ रुपये के जिंदल न्यूक्लियर पावर परियोजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उनके अनुसार किसी भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना केवल राज्य सरकार और निजी कंपनी के बीच एमओयू से संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार, परमाणु ऊर्जा विभाग और संबंधित नियामक संस्थाओं की स्वीकृति आवश्यक होती है। भाजपा ने सरकार से पूछा कि क्या इस परियोजना के लिए आवश्यक केंद्रीय अनुमति प्राप्त की गई है। यदि नहीं, तो इसे पूर्ण निवेश के रूप में प्रचारित करना उचित नहीं है।
औद्योगिक निवेश का स्वागत, लेकिन पारदर्शिता जरूरी
प्रतुल शाह देव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी राज्य के हित में होने वाले सभी औद्योगिक निवेशों का स्वागत करती है, लेकिन सरकार को निवेश संबंधी घोषणाओं में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में भाजपा के सह मीडिया प्रभारी अजय राय और नीरज सिंह भी मौजूद रहे।
