कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन करीब एक महीने के भीतर ही उन्होंने पद छोड़ दिया। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी में अपने अन्य सभी दायित्वों से भी इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं।

पार्टी प्रमुख को भेजा इस्तीफा

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी को संबोधित पत्र में प्रदेश अध्यक्ष पद के साथ-साथ अन्य जिम्मेदारियों से भी मुक्त करने का अनुरोध किया। उन्होंने अलग-अलग बैंकों में पार्टी खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी की अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में अपना नाम भी वापस ले लिया।

भट्टाचार्य को पांच जून को तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी के स्थान पर प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। इससे पहले वह पश्चिम बंगाल सरकार में वित्त और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।

फोन पर फटकार के बाद लिया फैसला

मीडिया से बातचीत में चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय ममता बनर्जी की ओर से फोन पर मिली फटकार के बाद लिया। उनके अनुसार, उन पर कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ पर बागी गुट को कब्जा करने देने का आरोप लगाया गया, जिससे उनकी निष्ठा और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।

उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा और ऐसे माहौल में पार्टी में बने रहने का कोई कारण नहीं बचा।

बागी गुट के नेताओं से भी की मुलाकात

इस्तीफे के कुछ समय बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य को विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के कक्ष में बागी गुट के नेताओं के साथ बैठक करते देखा गया। इस घटनाक्रम ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

तृणमूल नेताओं की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के करीबी कुणाल घोष ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब चंद्रिमा भट्टाचार्य को सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी, तब उन्हें किसी तरह की आपत्ति नहीं थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी की चुनावी हार के बाद ही आत्मसम्मान का मुद्दा सामने आया है।

फिलहाल चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे और उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चाओं का दौर जारी है।

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