रांची: बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से झारखंड में मानसून की गतिविधियां तेज होने वाली हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 26 से 28 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, वज्रपात और गरज-चमक की संभावना है। राजधानी रांची में 28 जुलाई तक आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
26 जुलाई को इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार 26 जुलाई को रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम में वज्रपात के साथ भारी बारिश हो सकती है। राज्य के अन्य जिलों में भी कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
27 और 28 जुलाई को भी जारी रहेगा बारिश का दौर
27 जुलाई को रांची, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है।
वहीं 28 जुलाई को रांची, खूंटी, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ में तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है।
वज्रपात से लातेहार में बुजुर्ग की मौत
शनिवार को लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र की चैनपुर पंचायत स्थित बहेराटोली गांव में वज्रपात की चपेट में आने से 70 वर्षीय सीरिल लकड़ा की मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
बहरागोड़ा में सबसे अधिक बारिश दर्ज
पिछले 24 घंटों के दौरान बहरागोड़ा में सबसे अधिक 6.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वहीं जमशेदपुर में 3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि मेदिनीनगर में राज्य का सबसे अधिक 33.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
अब भी सामान्य से 27 प्रतिशत कम हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 25 जुलाई तक झारखंड में सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस अवधि में सामान्यतः 444.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक केवल 323.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
हालांकि पश्चिमी सिंहभूम (2 प्रतिशत), सिमडेगा (2 प्रतिशत), सरायकेला-खरसावां (3 प्रतिशत), साहिबगंज (7 प्रतिशत) और रांची (14 प्रतिशत) में वर्षा की कमी अपेक्षाकृत कम रही है। वहीं चतरा, देवघर, गढ़वा, पाकुड़, पलामू, रामगढ़, गिरिडीह, कोडरमा और गोड्डा अब भी सबसे अधिक वर्षा की कमी वाले जिलों में शामिल हैं।

