Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest Poli news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    August 23, 2026

    स्त्री को देवी मत बनाईये, बस उसे उसके अधिकार दे दीजिये

    August 23, 2026

    कानपुर में छात्र का कथित पिस्टल के साथ वीडियो वायरल, पुलिस कार्रवाई की मांग

    August 15, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  
    • स्त्री को देवी मत बनाईये, बस उसे उसके अधिकार दे दीजिये
    • कानपुर में छात्र का कथित पिस्टल के साथ वीडियो वायरल, पुलिस कार्रवाई की मांग
    • JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा खुलासा, बिंसिस निदेशक अरुण कुमार पांच दिन की रिमांड पर; कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप
    • JPSC-JSSC आंदोलन में पहुंचे रघुवर दास, सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम; बोले- मांगें नहीं मानीं तो बैठूंगा अनशन पर
    • मधुकम के 12 मकानों के मामले में सुप्रीम कोर्ट से महादेव उरांव को झटका, एसएलपी खारिज
    • JPSC-JSSC विवाद पर कांग्रेस का BJP पर हमला, चार मंत्रियों ने कहा- छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग दे रही भाजपा
    • जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, महाधिवक्ता की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय समिति गठित
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Lok Chetna
    • Home
    • Jharkhand
      • Bokaro
      • Chatra
      • Deoghar
      • Dhanbad
      • Dumka
      • East Singhbhum
      • Garhwa
      • Giridih
      • Godda
      • Gumla
        • Hazaribagh
        • Jamtara
        • Khunti
        • Koderma
        • Latehar
        • Lohardaga
        • Pakur
        • Palamu
        • Ramgarh
        • Ranchi
        • Sahibganj
        • Saraikela Kharsawan
    • Bihar
    • Delhi
    • Opinion
    • Sports
    • About Us
      • Privacy Policy
      • Terms and Conditions
      • Contact Us
    Lok Chetna
    Home » संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  
    Entertainment

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    Siyasi KhabarBy Siyasi KhabarAugust 23, 2026No Comments10 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

                                                       अरविन्द कुमार पाण्डेय

    खांटी झारखंडी माटी से सनी हुई, झारखंडी संवेदना के धागों से बुनी हुई और खालिस झारखंडी जायके के साथ झारखण्ड में बनी हुई संथाली फिल्म आंगेन को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल उपलब्धि का उत्सव मनाने भर का नहीं है. हमें उन स्रोतों की तलाश करनी चाहिए जिनसे ताकत पाकर रवि राज मुर्मू जैसे झारखंडी युवाओं को आंगेन जैसी फिल्म बनाने की शक्ति मिलती है, प्रेरणा मिलती है. हम उन कमजोरियों की पड़ताल करें जिनकी वजह से झारखण्ड में आंगेन जैसी फ़िल्में बार – बार नहीं बन पातीं, लगातार नहीं बन पाती. यह भी पड़ताल करने की कोशिश होनी चाहिए कि संथाली के अलावा झारखण्ड की अन्य जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओँ की फ़िल्में आंगेन और रवि राज मुर्मू को हासिल हुई सफलता पाने की रेस में भी शामिल क्यों नहीं. वैसे, ज्यादा बेहतर होगा कि हम बजाय कमजोरियों के, शक्ति और प्रेरणा के स्रोतों पर, सफलता और उपलब्धि पानेवाली भाषा और उस भाषा में रचनाकर्म कर रही जमात की बेस्ट प्रैक्टिसेज पर ज्यादा फोकस करें.   

    झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा को “झॉलीवुड” के नाम से जाना जाता है। झॉलीवुड का कुल सालाना बॉक्स ऑफिस या व्यावसायिक कारोबार ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच ही सिमटा हुआ है। यहाँ अधिकांश फिल्में बहुत ही कम बजट यानि 5 लाख से 25 लाख रुपये तक में बनाई जाती हैं। फिल्मों की कमाई का मुख्य जरिया अब यूट्यूब, क्षेत्रीय ओटीटी ऐप्स और स्थानीय मेलों या सांस्कृतिक उत्सवों में होने वाली स्क्रीनिंग है।

    रांची, जमशेदपुर, धनबाद जैसे बड़े शहरों के मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों में हिंदी फिल्मों का दबदबा है। स्थानीय भाषाओं के दर्शक मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। थिएटर चेन न मिलने के कारण करोड़ों की आबादी होने के बावजूद फिल्मों को टिकट खरीदार नहीं मिल पाते। जिससे फिल्म निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। नेटफ्लिक्स या अमेज़न प्राइम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर नागपुरी, संथाली या मुंडारी जैसी भाषाओं के लिए कोई जगह नहीं है।

    वर्ष 2015 की झारखंड फिल्म नीति के तहत फिल्मों को सब्सिडी दी जाती थी, जिससे स्थानीय सिनेमा को बढ़ावा मिला था। हालांकि, बाद के वर्षों में नीतियों में बदलाव और राजनीतिक उदासीनता के कारण स्थानीय फिल्म निर्माताओं को मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता बंद या सीमित हो गई।

    स्थानीय फिल्मकारों का आरोप है कि नीति के शुरुआती वर्षों में सरकार ने बाहर के बड़े फिल्म निर्माताओं को तो करोड़ों की सब्सिडी जारी कर दी, लेकिन स्थानीय छोटे निर्माताओं की फाइलें दफ्तरों में अटकी रहीं.

    वर्ष 2020 के बाद राजनीतिक बदलावों और नौकरशाही की जटिलताओं के कारण क्षेत्रीय सिनेमा के लिए सब्सिडी का नियमित आवंटन लगभग ठप पड़ गया था, जिससे स्थानीय निर्माताओं को अपनी फिल्में रिलीज करने के लिए भारी कर्ज झेलना पड़ा.

    झॉलीवुड में सबसे सक्रिय बाज़ार नागपुरी भाषा का है। वर्ष 1994 में रिलीज़ हुई ‘सोना कर नागपुर’ यहाँ की पहली तकनीकी रूप से सफल व्यावसायिक फिल्म मानी जाती है। लेकिन अब नागपुरी में बड़े पैमाने पर केवल म्यूज़िक वीडियो और अल्बम ही बनते हैं क्योंकि इनका प्रोडक्शन बजट कम होता है और कमाई आसान होती है।

    यूट्यूब विज्ञापनों और स्टेज शो के जरिए कलाकार और निर्माता अच्छी कमाई कर लेते हैं, लेकिन बड़ी फिल्में बनाने में इन्हें आज भी वितरकों की कमी के कारण नुकसान उठाना पड़ता है।

    खोरठा भाषा झारखंड के सबसे बड़े हिस्से में बोली जाती है। आबादी बड़ी होने के बावजूद सिनेमा के मामले में यह संथाली या नागपुरी जितनी आत्मनिर्भर नहीं है। खोरठा में मुख्यधारा की फिल्मों का अभाव है; पूरा ध्यान केवल खोरठा लोकगीतों और झुमटा वीडियो पर केंद्रित है। कलाकार स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हैं, लेकिन वे इसे एक संगठित फिल्म उद्योग (Industry) का रूप नहीं दे पाए हैं।

    मुंडारी, कुड़ुख और हो झारखंड की अत्यंत समृद्ध जनजातीय भाषाएँ हैं, लेकिन सिनेमाई आत्मनिर्भरता के मामले में ये सबसे पीछे और संघर्षरत हैं।

    इन भाषाओं में साल में बमुश्किल 1 या 2 शॉर्ट फिल्में या डॉक्यूमेंट्री बनती हैं। इनका प्रदर्शन केवल सरहुल, करमा जैसे जनजातीय त्योहारों या विशेष सामुदायिक बैठकों में होता है।

    इन फिल्मों को बनाने वाले निर्माता पूरी तरह से व्यक्तिगत फंड, एनजीओ की सहायता या भाषा प्रेमियों के चंदे पर निर्भर होते हैं। व्यावसायिक रूप से इनसे कमाई न के बराबर होती है।

    झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा यानि झॉलीवुड में अपने Target Audience तक पहुँचने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के मामले में भाषाओं के बीच एक स्पष्ट और बड़ा अंतर देखने को मिलता है। इस मामले में संथाली सिनेमा सबसे आगे और पूरी तरह आत्मनिर्भर है, जबकि नागपुरी सिनेमा डिजिटल रूप से मजबूत है। वहीं खोरठा, मुंडारी, कुड़ुख और हो जैसी भाषाएं अभी भी संघर्ष के दौर से गुजर रही हैं।

    जाहिर है, जो समस्यायें पूरे झालीवुड की हैं, उन्हीं दुश्वारियों का सामना संथाली सिनेमा यानि ‘सॉलीवुड’ को भी करना पड़ता है| लेकिन संथाली सिनेमा ने इन आपदाओं में भी अपने लिए अवसर ढूंढ लिया है| मुख्यधारा की चकाचौंध से दूर, संथाली सिनेमा ने अपनी अनूठी वितरण प्रणाली और वफादार दर्शक वर्ग के दम पर असाधारण और उत्तरोत्तर विस्तार हासिल किया है।

    संथाली सिनेमा ने मुख्यधारा के सिनेमाघरों पर निर्भरता को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इनका अपना एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम है, जो देश में सबसे अनूठा है।

    इन्हें फिल्म बनाने और लागत निकालने के लिए न तो सरकारी सब्सिडी की जरूरत पड़ती है और ना ही किसी बड़े डिस्ट्रीब्यूटर की।

    संथाली सिनेमा के पास बड़े शहरों में मल्टीप्लेक्स चेन नहीं हैं, इसलिए फिल्म निर्माता खुद प्रोजेक्टर, पोर्टेबल स्क्रीन और साउंड सिस्टम लेकर ग्रामीण इलाकों और स्थानीय हाट-बाजारों में जाते हैं। गाँवों में शाम या रात के समय तंबू लगाकर ₹20 से ₹50 के टिकट पर फिल्में दिखाई जाती हैं। 

    हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और शोध के अनुसार, इस अनूठे मॉडल के जरिए कई संथाली फिल्म निर्माताओं ने पिछले 4-5 वर्षों में ग्रामीण प्रदर्शनियों से ही ₹50 लाख से ₹70 लाख से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह दर्शाता है कि इनका जमीनी बाज़ार बेहद मजबूत है। 

    उदाहरण के तौर पर संथाली फिल्म ‘बोंगा दाड़े’ और हालिया कई फिल्मों के निर्माताओं ने केवल झारखंड के संताल परगना और ओडिशा के मयूरभंज के गांवों में प्रोजेक्टर शो चलाकर अपनी लागत से दोगुना मुनाफा कमाया।

    संथाली भाषा में हर साल लगभग 8 से 12 पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्में और 100 से अधिक म्यूज़िक वीडियो/अल्बम बनते हैं। यहाँ फिल्में बहुत ही सीमित बजट यानी ₹15 लाख से ₹35 लाख के बीच तैयार हो जाती हैं। लागत कम होने के कारण जोखिम भी कम रहता है।

    पहले जो फिल्में सीधे वीसीडी या सीडी पर रिलीज होकर दम तोड़ देती थीं, वे अब डिजिटल माध्यमों से पंख फैला रही हैं. ‘रसुका एंटरटेनमेंट’ और स्थानीय संथाली डिजिटल चैनलों के यूट्यूब पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं। इनके म्यूज़िक वीडियो और शार्ट फिल्मों को करोड़ों व्यूज मिलते हैं, जिससे निर्माताओं को यूट्यूब मॉनिटाइजेशन से एक नियमित और बड़ी आय हो रही है।

    मुख्यधारा के नेटफ्लिक्स, डिज्नी हॉट स्टार या प्राइम जैसे प्लेटफॉर्म्स द्वारा जगह न दिए जाने पर, बड़े प्लेटफॉर्म्स की इस बेरुखी को देखते हुए, संथाली फिल्म इंडस्ट्री ने अपनी संस्कृति और फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय और स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का अपना एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है।

    वर्तमान में संथाली सिनेमा और कंटेंट मुख्य रूप से संथाली भाषा और कंटेंट को समर्पित ओटीटी प्लेटफॉर्म एसकेएल फ्लिक्स पर उपलब्ध हैं. इसके अलावा गूगल प्ले स्टोर पर कई स्वतंत्र एंड्रॉइड एप्लिकेशन उपलब्ध हैं, जो स्थानीय निर्माताओं के म्यूजिक एल्बम, कॉमेडी शो और क्षेत्रीय फिल्मों को ऑनलाइन स्ट्रीम और डाउनलोड करने की सुविधा देते हैं. 

    व्यावसायिक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से भी बड़ा बाज़ार संथाली कंटेंट को यूट्यूब पर मिला है। यहाँ इको संथाली मूवीज एंड सांग्स, शिवा म्यूजिक रीजनल जैसे कई बड़े प्रोडक्शन हाउस और म्यूजिक लेबल पूरी फिल्में और वीडियो मुफ्त या विज्ञापनों के साथ स्ट्रीम करते हैं.

    दशरथ हांसदा जैसे निर्देशकों की शुरुआती कोशिशों से लेकर अब तक, कई संथाली फिल्मों को कोलकाता इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टिवल या ढाका फिल्म फेस्टिवल जैसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया जा रहा है। 

    संथाली सिनेमा अपनी मिट्टी से जुड़ी कहानियों, लोककथाओं और सामाजिक जागरूकता के कारण एक आत्मनिर्भर ‘क्रिएटिव इकोनॉमी’ के रूप में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

    झारखंड में संथाली सिनेमा ने यह साबित किया है कि बिना मल्टीप्लेक्स और बिना सरकारी सब्सिडी के भी केवल दर्शकों के जुड़ाव यानि Audience Loyalty के दम पर एक सफल और आत्मनिर्भर आर्थिक मॉडल खड़ा किया जा सकता है। बाकी भाषाओं को भी अपने दर्शकों तक सीधे पहुँचने के लिए संथाली सिनेमा के इसी ‘जमीनी और सामुदायिक वितरण मॉडल’ को अपनाने की आवश्यकता है।

    Jharkhand Jharkhand News SANTHALI SANTHALI CINEMA झारखंड समाचार
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    Siyasi Khabar

    Related Posts

    स्त्री को देवी मत बनाईये, बस उसे उसके अधिकार दे दीजिये

    August 23, 2026

    JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा खुलासा, बिंसिस निदेशक अरुण कुमार पांच दिन की रिमांड पर; कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप

    August 13, 2026

    JPSC-JSSC आंदोलन में पहुंचे रघुवर दास, सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम; बोले- मांगें नहीं मानीं तो बैठूंगा अनशन पर

    August 13, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    Top Posts

    कानपुर में छात्र का कथित पिस्टल के साथ वीडियो वायरल, पुलिस कार्रवाई की मांग

    August 15, 2026373

    ईडी की बड़ी रणनीति, रांची जोन के जेडी प्रभाकर प्रभात को मिला कोलकाता जोन का अतिरिक्त प्रभार

    May 8, 2026243

    डालटनगंज रूट की 14 पैसेंजर ट्रेनें रद्द, 16 एक्सप्रेस ट्रेनों का मार्ग बदला गया

    June 22, 2026196

    धनबाद में बिजली कटौती पर भड़के सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, बोले- सुधार नहीं हुआ तो डीवीसी के खिलाफ होगा बड़ा आंदोलन

    April 22, 2026171
    Don't Miss
    Entertainment

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    By Siyasi KhabarAugust 23, 202610

                                                       अरविन्द कुमार पाण्डेय खांटी झारखंडी माटी से सनी हुई, झारखंडी संवेदना के धागों…

    स्त्री को देवी मत बनाईये, बस उसे उसके अधिकार दे दीजिये

    August 23, 2026

    कानपुर में छात्र का कथित पिस्टल के साथ वीडियो वायरल, पुलिस कार्रवाई की मांग

    August 15, 2026

    JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा खुलासा, बिंसिस निदेशक अरुण कुमार पांच दिन की रिमांड पर; कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप

    August 13, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest Political news from The Pulse of Politics.

    About Us

    Lok Chetna is a news portal committed to bringing impactful stories to the forefront. We focus on social issues, development and awareness to inform and inspire our community toward positive change.

    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    August 23, 2026

    JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा खुलासा, बिंसिस निदेशक अरुण कुमार पांच दिन की रिमांड पर; कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप

    August 13, 2026

    JPSC-JSSC आंदोलन में पहुंचे रघुवर दास, सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम; बोले- मांगें नहीं मानीं तो बैठूंगा अनशन पर

    August 13, 2026

    मधुकम के 12 मकानों के मामले में सुप्रीम कोर्ट से महादेव उरांव को झटका, एसएलपी खारिज

    August 13, 2026
    Bihar

    तेजस्वी यादव का NDA सरकार को अल्टीमेटम, बोले- छात्रों को रिहा नहीं किया तो होगा बड़ा आंदोलन

    July 27, 2026

    बांकीपुर उपचुनाव: आरजेडी प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने दाखिल किया नामांकन, हलफनामे में बताई करोड़ों की संपत्ति

    July 10, 2026

    बिहार में EOU की बड़ी कार्रवाई: सिवान के उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड़ के 5 ठिकानों पर छापेमारी, आय से 201% अधिक संपत्ति का आरोप

    July 9, 2026

    भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: मां आज से आमरण अनशन पर, दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग तेज

    July 9, 2026
    © 2026 Lok Chetna. Developed & Hosted by Midhaxa Innovations
    • Home
    • Terms and Conditions
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.