पटना: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच जारी है। इसी बीच बिहार सरकार द्वारा 53 डीएसपी रैंक के अधिकारियों के तबादले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। तबादला सूची में जगदीशपुर के पूर्व डीएसपी राजेश शर्मा का भी नाम शामिल है, जिन पर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर आरोप लगाए गए थे।
राजेश शर्मा के तबादले के बाद मृतक भरत तिवारी के परिजनों ने नाराजगी जताते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
मां ने न्याय की मांग दोहराई
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि उनके बेटे की मौत के मामले में न्याय दिलाने के बजाय आरोपित अधिकारी को नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे परिवार के जख्म और गहरे हुए हैं।
आशा देवी ने कहा कि उनकी मांग पहले की तरह आज भी वही है कि मामले के दोषियों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग भी दोहराई।
‘सरकार से न्याय की उम्मीद थी’
आशा देवी ने कहा कि बेटे की मौत के बाद परिवार को सरकार से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद थी, लेकिन आरोपी अधिकारी को नई पोस्टिंग मिलने की खबर से पूरा परिवार आहत है।
उन्होंने कहा कि उनका बेटा अब वापस नहीं आ सकता, लेकिन दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होने से ही परिवार को न्याय मिलने का एहसास होगा।
कार्रवाई नहीं हुई तो कानून पर उठेगा भरोसा
भरत तिवारी की मां ने मामले में लीपापोती का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आम लोगों का कानून-व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।
उन्होंने कहा कि पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है, लेकिन न्याय की लड़ाई से पीछे हटने वाला नहीं है।
उल्लेखनीय है कि तबादले के बाद पूर्व डीएसपी राजेश शर्मा को मद्य निषेध विभाग में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में उनके खिलाफ मामला दर्ज होने की बात भी सामने आई है। मामले की जांच अभी जारी है।

