नई दिल्ली: केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के पूर्व निजी सचिव संजीव हंस के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2019 में एक रियल एस्टेट कारोबारी से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से राहत दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत ली।
रियल एस्टेट कारोबारी से जुड़ा मामला
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला मुंबई स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने अपनी प्राथमिकी में संजीव हंस के साथ उनके कथित सहयोगी विपुल बंसल का भी नाम शामिल किया है।
बताया गया है कि विपुल बंसल आरएनए कॉर्पोरेशन से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा कंपनी के प्रमोटर अनुभव अग्रवाल और सहयोगी कंपनी ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स समेत अन्य लोगों को भी इस मामले में नामजद किया गया है।
रियायत दिलाने के बदले रिश्वत का आरोप
प्राथमिकी के अनुसार, आरोप है कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मामले में रियायत दिलाने के बदले यह रिश्वत ली गई। जांच एजेंसी अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी
सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के बाद संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

