पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सम्राट चौधरी अब राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। एनडीए विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगने के बाद यह लगभग तय हो गया है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

मुंगेर जिले की तारापुर विधानसभा सीट से आने वाले सम्राट चौधरी को भाजपा के प्रमुख और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है।

राजद से शुरुआत, भाजपा में मजबूत पहचान

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। कम समय में ही उन्होंने पार्टी में अपनी मजबूत पकड़ बना ली और रणनीतिक सोच व संगठन क्षमता के कारण शीर्ष नेताओं में शामिल हो गए।

शिक्षा और पृष्ठभूमि

सम्राट चौधरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिहार में प्राप्त की और बाद में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने अपने हलफनामे में प्री फाउंडेशन कोर्स पूरा करने का उल्लेख किया है। इसके अलावा उन्हें मानद उपाधि भी प्राप्त है।

हालांकि उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है, लेकिन उनका मानना है कि उनकी पहचान उनके प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक कार्यशैली से है।

महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी

अपने राजनीतिक सफर के दौरान सम्राट चौधरी को कई अहम विभागों की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने नगर विकास, आवास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले।

उन्हें एक सख्त प्रशासक और मुखर नेता के रूप में जाना जाता है। वर्ष 2024 में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई।

राजनीतिक सफर

  • 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश
  • 1999 में कृषि मंत्री बने
  • 2000 और 2010 में विधायक चुने गए
  • 2014 में शहरी विकास और आवास मंत्री रहे
  • 2024 में उपमुख्यमंत्री बने

व्यक्तिगत जीवन

सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ। उनके पिता शकुनी चौधरी और माता पार्वती देवी हैं। वर्ष 2007 में उनका विवाह ममता चौधरी से हुआ। उनके दो बच्चे हैं।

सियासत में बढ़ता कद

सम्राट चौधरी को उनकी राजनीतिक रणनीति, संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ के लिए जाना जाता है। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version