रांची : झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। राज्य में दो अलग-अलग मामलों में रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच के दौरान एसीबी कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ने में विफल रही। दोनों मामलों में सत्यापन और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी ट्रैपिंग अभियान सफल नहीं हो सका।
सूत्रों के अनुसार, दोनों मामलों में एसीबी ने पूरी तैयारी के साथ कार्रवाई की थी, लेकिन आरोपित अधिकारियों तक पहुंचने से पहले ही कार्रवाई की भनक लगने की आशंका जताई जा रही है। अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर ट्रैपिंग अभियान क्यों असफल हुआ और इसके पीछे क्या कारण रहे।
बोकारो में एक करोड़ रुपये घूस मांगने का आरोप
पहला मामला बोकारो जिले के बालीडीह थाना से जुड़ा है। एक विवादित जमीन मामले में थाना प्रभारी नवीन कुमार सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसीबी में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मामले के निपटारे के नाम पर उससे एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। एसीबी ने आरोपों का सत्यापन कराया और प्रथम दृष्टया मामला सही पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज कर ली।
इसके बाद मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति के साथ विशेष टीम गठित कर ट्रैपिंग की योजना बनाई गई। हालांकि, जब एसीबी की टीम कार्रवाई के लिए बोकारो पहुंची तो आरोपित थाना प्रभारी को पहले ही इसकी जानकारी मिल जाने की बात सामने आई। नतीजतन टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा।
धनबाद में भी नहीं मिली सफलता
दूसरा मामला धनबाद साइबर थाना से संबंधित है। यहां पदस्थापित एक इंस्पेक्टर और वर्ष 2018 बैच के एक दरोगा के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत एसीबी को मिली थी।
शिकायत की जांच और सत्यापन के बाद इस मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद एसीबी ने ट्रैपिंग की तैयारी करते हुए छापेमारी की योजना बनाई, लेकिन इस कार्रवाई में भी टीम आरोपित अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ने में सफल नहीं हो सकी।
कार्रवाई विफल होने के बाद एसीबी की टीम ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने वरीय अधिकारियों को सौंप दी है।
पुलिस मुख्यालय की सख्ती, बोकारो थानेदार पर कार्रवाई
बोकारो मामले में एसीबी की कार्रवाई असफल रहने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया। मुख्यालय से पत्राचार होने के बाद बोकारो के पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा ने बालीडीह थाना प्रभारी नवीन कुमार सिंह समेत संबंधित अधिकारियों को लाइन हाजिर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, मामले में संबंधित इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
ट्रैपिंग विफल होने पर उठे सवाल
लगातार दो मामलों में एसीबी की ट्रैपिंग कार्रवाई असफल रहने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोपनीय कार्रवाई की जानकारी आरोपित अधिकारियों तक कैसे पहुंची। अब यह देखना होगा कि एसीबी दर्ज मामलों को आगे बढ़ाती है या फिर जांच के लिए नए निर्देश जारी किए जाते हैं।
फिलहाल दोनों मामलों को लेकर विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज है तथा आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

