रांची: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर 750 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले को लेकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने राज्यपाल से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की।
एसीबी की भूमिका पर उठाए सवाल
मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य की जांच एजेंसी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो निष्पक्ष जांच करने में विफल रही है और सत्ता से जुड़े लोगों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि एजेंसी ने जानबूझकर साक्ष्यों और कानूनी समय-सीमा के साथ समझौता किया है।
750 करोड़ तक पहुंचा घोटाला
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, वर्ष 2022 में राज्य की उत्पाद नीति में बदलाव कर एक सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ। शुरुआती तौर पर 38 करोड़ रुपये का आंका गया यह मामला अब बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है।
गिरफ्तारी के बाद भी मिली राहत
मरांडी ने बताया कि इस मामले में कई अधिकारियों और कारोबारियों की गिरफ्तारी हुई थी, जिनमें आईएएस अधिकारी और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे। हालांकि, आरोप है कि समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण अधिकांश आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई।
उन्होंने कहा कि 90 दिनों की वैधानिक समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल न करने के चलते 17 में से 14 आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई, जो जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फरार आरोपी का मामला भी उठाया
मरांडी ने छत्तीसगढ़ के एक कारोबारी के फरार होने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि गिरफ्तारी के बाद भी एजेंसी उसे दोबारा पकड़ने में विफल रही है। इससे जांच एजेंसी की कार्यशैली पर और संदेह गहराता है।
सीबीआई जांच की मांग
ज्ञापन में मरांडी ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी जाए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने राज्यपाल से संविधान के संरक्षक के रूप में हस्तक्षेप करने की अपील की।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे बड़ा घोटाला बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
