जमशेदपुर: जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सीएच एरिया के चर्चित कारोबारी देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। मामले में मास्टरमाइंड बताए जा रहे लुधियाना के गैंगस्टर तेजिंदर पाल सिंह के जमशेदपुर से जुड़े स्थानीय संपर्कों की तलाश तेज कर दी गई है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि तेजिंदर पाल सिंह ने जमशेदपुर के कुछ स्थानीय अपराधियों से मिली जानकारी के आधार पर इस अपहरण की योजना बनाई थी। इसी इनपुट के जरिए उसे यह पता चला था कि कैरव गांधी का अपहरण करने पर मोटी फिरौती मिल सकती है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बिहार के नालंदा निवासी गुड्डू सिंह और इमरान को रेकी के लिए जमशेदपुर भेजा गया था। इन दोनों ने शहर में कैरव की गतिविधियों पर नजर रखी थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन दोनों को स्थानीय स्तर पर किसने मदद दी और किसने उन्हें ठहरने व घूमने-फिरने में सहयोग किया।

पुलिस का मानना है कि जमशेदपुर में कोई स्थानीय गिरोह तेजिंदर पाल सिंह के संपर्क में था, जो लगातार उसे जानकारी दे रहा था। इसी लोकल नेटवर्क के जरिए अपहरण की पूरी योजना को अंजाम दिया गया।

फिलहाल पुलिस सोनारी, कदमा, मानगो, कपाली, गोलमुरी और बागबेड़ा क्षेत्र के संदिग्ध बदमाशों पर नजर बनाए हुए है। इन इलाकों में मुखबिरों का नेटवर्क सक्रिय कर दिया गया है, ताकि स्थानीय लिंक का खुलासा किया जा सके।

गौरतलब है कि 13 जनवरी को कैरव गांधी का कदमा-सोनारी लिंक रोड से अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद पुलिस ने व्यापक छापेमारी अभियान चलाया था। 26 जनवरी को सूचना मिली थी कि अपहरणकर्ता कैरव को दूसरी जगह शिफ्ट करने वाले हैं, जिसके बाद पुलिस की टीमें जीटी रोड और हजारीबाग क्षेत्र में तैनात की गई थीं।

बाद में अपहरणकर्ताओं ने कैरव को बरही-चौपारण क्षेत्र के पास छोड़ दिया था, जहां से पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बरामद कर घर पहुंचाया था। इस मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कुछ आरोपी अभी भी फरार हैं।

पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

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