जमशेदपुर : प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मोहरदा क्षेत्र में बन रहे मकानों के निर्माण में देरी और तैयार फ्लैट लाभुकों को नहीं सौंपे जाने को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने नाराजगी जताई है। मंगलवार को उन्होंने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
तैयार मकानों की चाबी नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई मकान पूरी तरह तैयार होने के बावजूद अब तक लाभुकों को उनकी चाबी नहीं सौंपी गई है। इससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। एक दिन पहले कई लाभुक बिष्टुपुर स्थित विधायक कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या रख चुके थे, जिसके बाद विधायक खुद मौके पर पहुंचे।
सरयू राय ने कहा कि जिन लोगों ने अपनी जमा पूंजी या कर्ज लेकर मकानों के लिए भुगतान किया है, उन्हें अनावश्यक इंतजार कराना गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द चाबी नहीं दी गई तो लाभुक खुद ही अपने घरों में प्रवेश करने को मजबूर हो जाएंगे।
जुडको की कार्यशैली पर उठाए सवाल
विधायक ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संस्था की धीमी गति और लापरवाही के कारण योजना प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक केवल दो ब्लॉक ही पूरी तरह तैयार हो पाए हैं, जबकि कई ब्लॉकों का निर्माण अधूरा है और कुछ अभी शुरुआती चरण में हैं।
आर्थिक बोझ झेल रहे लाभुक
विधायक ने कहा कि अधिकांश लाभुक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। कई लोगों ने बैंक से ऋण लेकर मकानों के लिए भुगतान किया है और वे एक साथ किराया और ईएमआई दोनों का बोझ उठा रहे हैं। ऐसे में देरी उनकी आर्थिक स्थिति को और कठिन बना रही है।
बिजली कनेक्शन में भी देरी
निरीक्षण के दौरान बिजली कनेक्शन की समस्या भी सामने आई। करीब 80 लोगों ने भुगतान कर दिया है, लेकिन अब तक किसी भी घर में मीटर नहीं लगाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित एजेंसियों की अनुमति मिलने के बाद ही कनेक्शन दिया जाएगा।
इस पर विधायक ने विभागों के बीच समन्वय की कमी पर चिंता जताई।
CAG जांच की चेतावनी
सरयू राय ने आशंका जताई कि मकानों के वितरण में देरी किसी औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम के कारण हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा है तो ऑनलाइन उद्घाटन कर लाभुकों को जल्द घर सौंपा जाए।
उन्होंने साफ कहा कि यदि दो दिनों में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह मामले को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के समक्ष उठाकर जुडको की जांच की मांग करेंगे।

