रांची: असम विधानसभा की 126 सीटों पर गुरुवार को मतदान जारी है। राज्य में करीब 2.50 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। फिलहाल राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री हैं।

चुनाव में बढ़ी दिलचस्पी

इस बार चुनाव को खास बनाता है झारखंड मुक्ति मोर्चा की एंट्री। पार्टी ने पहली बार असम में 18 उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। झारखंड के मुख्यमंत्री और जेएमएम के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन के साथ मिलकर पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जोरदार प्रचार किया।

“टी-ट्राइबल” मुद्दे पर फोकस

जेएमएम ने चुनाव प्रचार के दौरान “टी-ट्राइबल” मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इसके जरिए पार्टी ने असम के आदिवासी और वंचित वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई।

बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला

असम में पिछले दो चुनावों से हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी सत्ता में है, लेकिन कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी लगातार बढ़ा है। पिछली बार कांग्रेस को बीजेपी से महज एक प्रतिशत कम वोट मिले थे। ऐसे में इस बार जेएमएम की मौजूदगी ने चुनावी समीकरण को और रोचक बना दिया है।

हेमंत सोरेन की मतदाताओं से अपील

मतदान के बीच हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के जरिए असम के मतदाताओं को संदेश दिया। उन्होंने इसे लोकतंत्र का पावन पर्व बताते हुए लोगों से बढ़-चढ़कर मतदान करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मतदान नहीं, बल्कि अपने अधिकार, स्वाभिमान और भविष्य को तय करने का दिन है। उन्होंने शोषित और वंचित समाज समेत सभी मतदाताओं से एकजुट होकर अपने हक और उज्ज्वल भविष्य के लिए मतदान करने का आह्वान किया।

सोरेन ने अपने संदेश में यह भी कहा कि हर एक वोट अन्याय, झूठ और धनतंत्र के खिलाफ आवाज है और यही लोकतंत्र की असली ताकत है।

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