रांची: राजधानी के राज अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत और करीब 22 लाख रुपये का बिल सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर हो गया है। सोशल मीडिया पर घटना के वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। इसके बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन ने शुरू की जांच
मुख्यमंत्री के निर्देश पर रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की ओर से गठित जिला स्तरीय जांच टीम राज अस्पताल पहुंची। अधिकारियों ने इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, बिलिंग से संबंधित अभिलेख और उपचार की पूरी प्रक्रिया की जांच की।
प्रारंभिक जांच के दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रशासन पूरे मामले के तथ्यों की गहन पड़ताल कर रहा है।
परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
मृतक की पहचान लातेहार निवासी राजू रंजन के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि पैर में फ्रैक्चर होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन समय पर उचित ड्रेसिंग और इलाज नहीं किया गया। इससे संक्रमण बढ़ता गया और बाद में मरीज को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा।
परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान अस्पताल ने करीब 22 लाख रुपये का बिल बनाया। मरीज की मौत के बाद उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने भी दिए जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को अलग से जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
राज अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज का इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में किया गया था। अस्पताल का दावा है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए पैर काटने की सलाह दी गई थी, लेकिन परिजनों ने इसके लिए अनुमति नहीं दी।
प्रबंधन ने यह भी कहा कि वह जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देगा और जांच में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी।
अस्पताल में हिंसा और तोड़फोड़ की निंदा
इस बीच एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया, झारखंड ने मरीज की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए अस्पताल परिसर में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की निंदा की है। संगठन ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कानून के दायरे में रहकर ही दोषियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

