रांची: राजधानी के सदर अस्पताल में कार्डियोलॉजी यूनिट शुरू होने के बावजूद अब तक कैथ लैब स्थापित नहीं हो सकी है। इसके कारण हृदय रोगियों को एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं के लिए दूसरे अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
वर्तमान में अस्पताल में कार्यरत तीन कार्डियोलॉजिस्ट मरीजों की जांच और दवाओं के माध्यम से उपचार कर रहे हैं, लेकिन इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी से जुड़ी प्रक्रियाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।
कैथ लैब नहीं होने से बढ़ रही मरीजों की परेशानी
विशेषज्ञों के अनुसार, कैथ लैब हृदय रोगों की जांच और उपचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाओं में से एक है। इसके अभाव में गंभीर मरीजों के इलाज में देरी होती है, जिससे उनकी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निजी अस्पतालों में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण जैसी प्रक्रियाओं पर लाखों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंच रहे हृदय रोगी
सदर अस्पताल की हृदय रोग ओपीडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि, उन्नत उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई मरीजों को निराश होकर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
चिकित्सकों का मानना है कि कैथ लैब शुरू होने से गंभीर हृदय रोगियों का समय पर इलाज संभव हो सकेगा और रेफरल की आवश्यकता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
दो वर्षों से लंबित है कैथ लैब की स्थापना
जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल में कैथ लैब स्थापित करने की प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से चल रही है, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कैथ लैब शुरू होने के बाद एक ही परिसर में हृदय रोगियों को जांच, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और उपचार की समग्र सुविधा उपलब्ध होगी। इससे केवल रांची ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को भी बेहतर और समय पर उपचार मिल सकेगा।
फिलहाल कैथ लैब के अभाव में मरीजों को उन्नत हृदय उपचार के लिए अन्य सरकारी या निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
