रांची: भगवान बिरसा जैविक उद्यान, ओरमांझी ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उद्यान में पहली बार कृत्रिम ऊष्मायन (आर्टिफिशियल इन्क्यूबेशन) तकनीक के माध्यम से 18 स्वस्थ मोर के चूजों की सफल हैचिंग कराई गई है। इसे भारतीय मोर के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वैज्ञानिक निगरानी में पूरी हुई प्रक्रिया
उद्यान प्रबंधन के अनुसार, कृत्रिम ऊष्मायन तकनीक अपनाने से अंडों के सुरक्षित विकास और चूजों के जीवित रहने की संभावना पहले की तुलना में अधिक बढ़ी है। पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व वैज्ञानिक पार्थ सारथी मंडल ने किया। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से अंडों का चयन, इन्क्यूबेशन प्रबंधन, तापमान और आर्द्रता की नियमित निगरानी के साथ चूजों की देखभाल सुनिश्चित की।
इस अभियान में सहायक वन संरक्षक अशोक कुमार सिंह, वन क्षेत्र पदाधिकारी गायत्री देवी, पशु चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश साह तथा उद्यान के वनरक्षियों और पशुपालकों की टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभी 18 चूजे पूरी तरह स्वस्थ
उद्यान प्रशासन ने बताया कि टीमवर्क, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी की बदौलत सभी 18 चूजे पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन्हें वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तैयार की गई विशेष नर्सरी में रखा गया है, जहां उनके स्वास्थ्य, पोषण और विकास पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पहले कोबरा के बच्चों का भी हुआ था सफल जन्म
गौरतलब है कि भगवान बिरसा जैविक उद्यान ने हाल ही में एक और बड़ी सफलता हासिल की थी। पिछले सप्ताह यहां कृत्रिम ऊष्मायन तकनीक के माध्यम से कोबरा के पांच स्वस्थ बच्चों का भी सफल जन्म कराया गया था। लगातार मिल रही इन सफलताओं से उद्यान वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।

