रांची: झारखंड में 115.40 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले की जांच के दौरान गिरफ्तार ठेकेदार और जमीन कारोबारी लोकेश्वर साह उर्फ लोकेश साह (43) ने सीआईडी के समक्ष दिए गए अपने स्वीकारोक्ति बयान में कई गंभीर दावे किए हैं। हालांकि, सीआईडी ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है और जांच अभी जारी है।
होटल में हुई बैठक, हत्या की साजिश का दावा
लोकेश्वर साह के अनुसार, झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट और झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की राशि कथित रूप से फर्जी बैंक खाते में स्थानांतरित होने के बाद दुर्गा पूजा से पहले रांची के एक होटल में बैठक हुई थी। उसने दावा किया कि बैठक में कथित सरगना अर्घ्य सेन गुप्ता उर्फ अर्णव गांगुली, समीर कुमार उर्फ रुद्र प्रताप, तत्कालीन बैंक प्रबंधक लोलस लकड़ा और वह स्वयं मौजूद थे।
उसके अनुसार, बैठक के बाद कथित रूप से बैंक प्रबंधक की हत्या कराने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन उसने सरकारी कर्मचारी की हत्या कराने से इनकार कर दिया। इस दावे की भी जांच की जा रही है।
बिजली विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
अपने बयान में लोकेश्वर साह ने आरोप लगाया कि कथित फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों को पहले से “सेट” किया गया था। उसने दावा किया कि कुछ अधिकारियों के हस्ताक्षर से फाइलें आगे बढ़ीं और उनकी बैंक प्रबंधक से सीधी बातचीत होती थी।
बयान के अनुसार, झारखंड बिजली वितरण निगम के नाम पर कथित फर्जी बैंक खाता खोलकर पहले से मौजूद सावधि जमा राशि तोड़ी गई और बड़ी रकम विभिन्न शहरों के खातों में भेजी गई। बाद में कथित तौर पर फर्जी सावधि जमा दस्तावेज तैयार कर विभाग को उपलब्ध कराए गए।
पैसों के बंटवारे को लेकर भी किए दावे
लोकेश्वर साह ने अपने बयान में दावा किया कि घोटाले की रकम के बंटवारे की भी पहले से योजना बनाई गई थी। उसके अनुसार:
- तत्कालीन बैंक प्रबंधक को कुल राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा मिलना था।
- बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों के लिए कथित तौर पर 50 प्रतिशत हिस्सेदारी तय की गई थी।
- इसी हिस्से से अन्य कथित बिचौलियों और संबंधित लोगों को भुगतान किया जाना था।
- उसने दावा किया कि उसे इस पूरे मामले में शामिल रहने के बदले 2.75 करोड़ रुपये मिले थे।
अवैध कमाई के इस्तेमाल का भी दावा
लोकेश्वर साह ने दावा किया कि कथित अवैध कमाई से उसने 25 लाख रुपये के आभूषण खरीदे, पुरानी गाड़ी बदलकर नई एक्सयूवी-700 खरीदी तथा खूंटी के कर्रा क्षेत्र में लगभग 1.20 करोड़ रुपये में आठ एकड़ जमीन खरीदने के लिए भुगतान किया। उसने यह भी दावा किया कि उसने स्कूल बैग में नकद 70 लाख रुपये और बाद में 20 लाख रुपये तत्कालीन बैंक प्रबंधक को दिए थे।
जांच जारी, दावों की पुष्टि बाकी
सीआईडी के अनुसार, लोकेश्वर साह के बयान में घोटाले की कथित साजिश, पैसों के लेन-देन और अन्य आरोपियों की भूमिका से जुड़ी कई जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि स्वीकारोक्ति में किए गए सभी दावों का सत्यापन जांच के दौरान किया जाएगा और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

