Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest Poli news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    असम के बाजारों से लेकर रिलायंस मार्ट तक झारखण्ड के नेतरहाट की नाशपाती की धूम, महिला किसानों की आमदनी को मिला नया बूम

    September 1, 2026

    झारखंड में स्थानीय फिल्मों को मिले बढ़ावा, सीड फन्डिंग की हो व्यवस्था : असीम सिन्हा

    August 24, 2026

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    August 23, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • असम के बाजारों से लेकर रिलायंस मार्ट तक झारखण्ड के नेतरहाट की नाशपाती की धूम, महिला किसानों की आमदनी को मिला नया बूम
    • झारखंड में स्थानीय फिल्मों को मिले बढ़ावा, सीड फन्डिंग की हो व्यवस्था : असीम सिन्हा
    • संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  
    • स्त्री को देवी मत बनाईये, बस उसे उसके अधिकार दे दीजिये
    • कानपुर में छात्र का कथित पिस्टल के साथ वीडियो वायरल, पुलिस कार्रवाई की मांग
    • JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा खुलासा, बिंसिस निदेशक अरुण कुमार पांच दिन की रिमांड पर; कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप
    • JPSC-JSSC आंदोलन में पहुंचे रघुवर दास, सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम; बोले- मांगें नहीं मानीं तो बैठूंगा अनशन पर
    • मधुकम के 12 मकानों के मामले में सुप्रीम कोर्ट से महादेव उरांव को झटका, एसएलपी खारिज
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Lok Chetna
    • Home
    • Jharkhand
      • Bokaro
      • Chatra
      • Deoghar
      • Dhanbad
      • Dumka
      • East Singhbhum
      • Garhwa
      • Giridih
      • Godda
      • Gumla
        • Hazaribagh
        • Jamtara
        • Khunti
        • Koderma
        • Latehar
        • Lohardaga
        • Pakur
        • Palamu
        • Ramgarh
        • Ranchi
        • Sahibganj
        • Saraikela Kharsawan
    • Bihar
    • Delhi
    • Opinion
    • Sports
    • About Us
      • Privacy Policy
      • Terms and Conditions
      • Contact Us
    Lok Chetna
    Home » झारखंड का सबसे बड़ा अस्पताल या सत्ता का अखाड़ा? रिम्स के विवादों की पूरी टाइमलाइन
    Lead News

    झारखंड का सबसे बड़ा अस्पताल या सत्ता का अखाड़ा? रिम्स के विवादों की पूरी टाइमलाइन

    Lok ChetnaBy Lok ChetnaJuly 5, 2026No Comments133 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    रांची : बड़े अजीब दौर से गुजर रहे हैं हम और आप. बड़े अजीब दिन देख रहा है अपना झारखण्ड. राज्य के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रिम्स की ख़बरें अखबारों की फ्रंट पेज पर छप रही हैं, टीवी न्यूज़ की हैडलाइन बन रही है, सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रही है. इसलिए नहीं कि इलाज़ के मामले में या मेडिकल की पढ़ाई में यहाँ कोई करिश्मा हो गया बल्कि इसलिए क्योंकि यहाँ टेंडर में, उपकरणों और मशीनों की खरीद में, एडमिशन में बड़े पैमाने पर घपला हुआ है. इसलिए क्योंकि झारखण्ड बनने के बाद से अबतक रिम्स के डायरेक्टर और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के बीच खींचतान चलती रही है. इसलिए क्योंकि रसूखदार संसाधनों, ओहदों, अधिकारों और नाजायज कमाई की छीनाझपटी में लगे रहे और रिम्स की जमीन बिकती रही – बंटती रही.

    तो भैया, अगर आप बीमार हैं या किसी भी तरह की सरकारी मदद के तलबगार हैं तो आपको मेरी शुभकामनायें क्योंकि यहां तो जिसके ऊपर आपके इलाज़ की जिम्मेवारी है, जिसे आपकी मदद करनी है, वो सिस्टम खुद बीमार है.

    तो बात बीमार सिस्टम की और चर्चा उस रिम्स की जो पूरे झारखण्ड के गरीब बीमारों की आख़िरी उम्मीद है लेकिन हाकिमों की नूराकुश्ती में फंसा खुद बीमार – लाचार कराह रहा है.

    रिम्स में टेंडर और एडमिशन में हुई गड़बड़ियों की CID ने जांच शुरू कर दी है और जैसा कि कहा जा रहा है कि इसके डर से रिम्स के निदेशक ने इस्तीफा दे दिया, सरकार ने फ़िलहाल प्रभारी निदेशक नियुक्त किया है.

    तो क्या रिम्स में ऐसा पहली बार हुआ है? क्या रिम्स में केवल उतनी ही गड़बड़ियां हुई हैं जितने की जांच CID कर रही है? क्या रिम्स की गड़बड़ियों के लिए केवल वही निदेशक जिम्मेवार हैं जिन्होंने इस्तीफा दिया है? इन सभी सवालों का जवाब होगा बड़ा वाला नहीं.

    भैया रिम्स तो झारखण्ड के अबतक के तमाम स्वास्थ्य मंत्रियों, रिम्स के तमाम निदेशकों और बड़े ओहदेदारों, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों सबके लिए पसंदीदा प्ले ग्राउंड रहा है.

    मैं झारखण्ड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स को रसूखदारों का “प्ले ग्राउंड” इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यहां राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप, टेंडर विवाद, नियुक्तियों और एडमिशन में धांधली, निदेशकों की असामयिक विदाई जैसे कई उदाहरण हैं, जो राज्य गठन के बाद से ही लगातार विवादों में रहे हैं।

    देखा यह गया है कि ज्यादातर स्वास्थ्य मंत्री, जो रिम्स शासी परिषद यानि Governing Council के पदेन अध्यक्ष होते हैं, नीतिगत फैसलों के बजाय अक्सर सीधे प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप करने में ज्यादा रूचि लेते हैं.

    डॉ. तुलसी महतो का कार्यकाल सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सीधे हस्तक्षेप का एक बड़ा उदाहरण रहा है।

    मई 2014 में, जूनियर डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच हिंसक झड़प के ठीक एक दिन बाद, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने तत्कालीन निदेशक डॉ. तुलसी महतो को पद से हटा दिया था.

    सरकार ने उन्हें हटाने के पीछे तर्क दिया कि निदेशक पद के लिए अधिकतम उम्र सीमा 60 वर्ष है और वे एक्सटेंशन पर चल रहे थे। इनके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका भी लंबित थी।

    तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह द्वारा डॉ. तुलसी महतो को हटाकर एक नॉन-टीचिंग कैडर के डॉक्टर डॉ. एस.के. चौधरी को निदेशक का प्रभार देने से तत्कालीन सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के भीतर भी भारी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था. डॉ. महतो ने बाद में अपने सेवा लाभों को लेकर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।

    एम्स ऋषिकेश से आए डॉ. दिनेश कुमार सिंह का कार्यकाल तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के साथ सीधे टकराव के लिए जाना जाता है।

    वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के संकट के दौरान स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और डॉ. डी.के. सिंह के बीच प्रशासनिक फैसलों को लेकर लगातार अनबन रही। मंत्री उन्हें हटाकर अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रभार देना चाहते थे।

    जब डॉ. डी.के. सिंह का चयन एम्स भटिंडा में कार्यकारी निदेशक के रूप में हुआ, तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को महज एक औपचारिक सूचना भेजी. स्वास्थ्य मंत्री ने तुरंत उन्हें रिम्स से विरमित करने की अनुशंसा मुख्यमंत्री को भेज दी. शुरुआत में मुख्यमंत्री ने कोरोना संकट को देखते हुए केंद्र के अनुरोध पर उन्हें बनाए रखा था, लेकिन अंततः मंत्री के लगातार दबाव के आगे डॉ. डी.के. सिंह को पद छोड़ना ही पड़ा और रिम्स एक बार फिर प्रभारी के भरोसे आ गया.

    डॉ. डी.के. सिंह के जाने के बाद देश के जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कामेश्वर प्रसाद को निदेशक बनाया गया था। उनका कार्यकाल भी रिम्स की आंतरिक राजनीति, डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस विवाद और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ समन्वय की कमी के कारण लगातार अखबारों की सुर्खियों में रहा।

    एम्स ऋषिकेश के संस्थापक सदस्यों में से एक डॉ. राजकुमार का कार्यकाल हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा विवादित रहा।

    जनवरी 2024 में पद संभालने के बाद से ही डॉ. राजकुमार का स्वास्थ्य विभाग और अपर मुख्य सचिव के साथ नीतिगत फैसलों पर लगातार टकराव रहा. अगस्त 2025 में स्वास्थ्य विभाग ने उन पर मनमाने ढंग से काम करने और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया.

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के दबाव में सरकार ने जब डॉ. राजकुमार को पद से हटाया, तो वे झारखंड हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने सरकार के हटाने के आदेश को “कलंकपूर्ण” (Stigmatic) बताते हुए उस पर रोक लगा दी और उन्हें दोबारा बहाल किया.

    कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। जून 2026 में मुख्यमंत्री के आदेश पर CID ने वर्ष 2025 के एमबीबीएस/बीडीएस दाखिलों में फर्जी प्रमाण पत्र और रिम्स के सफाई/सुरक्षा टेंडर घोटालों को लेकर रिम्स में बड़ी छापेमारी की. डॉ. राजकुमार से घंटों पूछताछ की गई, जिसके ठीक अगले ही दिन 25 जून 2026 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को प्रभारी निदेशक बनाया गया.

    दरअसल, रिम्स की नियमावली और प्रशासनिक ढांचे में कुछ ऐसी व्यवस्थाएं हैं जो स्वास्थ्य मंत्री को सीधे तौर पर बेहद शक्तिशाली बनाती हैं। रिम्स को एक स्वायत्त यानि Autonomous संस्थान तो बनाया गया है, लेकिन इसके ‘रिम्स नियमावली 2002’ के नियम मंत्रियों को संस्थान के आंतरिक प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में सीधा वीटो पावर देते हैं। यही दोहरा प्रशासनिक ढांचा निदेशक बनाम मंत्री टकराव की मुख्य वजह बनता है.

    रिम्स की सर्वोच्च नीति-निधारक संस्था शासी परिषद (Governing Council) होती है। नियमावली के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ही इसके पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष होते हैं।

    अस्पताल के विकास, उपकरणों की खरीद, या डॉक्टरों की बहाली से जुड़े सभी बड़े प्रस्तावों को शासी परिषद से पास कराना अनिवार्य होता है। यदि निदेशक और मंत्री के बीच वैचारिक मतभेद हो, तो मंत्री परिषद की बैठक न बुलाकर या प्रस्तावों को लटकाकर निदेशक की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पंगु बना सकते हैं।

    रिम्स नियमावली 2002 के नियम-9 (vi) के तहत लोक हित (Public Interest) का हवाला देकर स्वास्थ्य मंत्री सह शासी परिषद के अध्यक्ष को यह शक्ति प्राप्त है कि वे निदेशक को 3 महीने का वेतन और भत्ता देकर तत्काल प्रभाव से पद से हटा सकते हैं।

    मंत्रियों द्वारा इस नियम का उपयोग प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय “राजनीतिक हथियार” के रूप में किया जाता रहा है। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2025 में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इसी नियम का हवाला देकर तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार को पद से हटा दिया था, जिसे बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने “दोषपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण” मानते हुए खारिज कर दिया था।

    रिम्स में होने वाले बड़े वित्तीय खर्चों, जैसे करोड़ों रुपये की दवा खरीद, सुरक्षा, और सफाई के टेंडर, के लिए शासी परिषद और स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी आवश्यक होती है।

    निदेशक फाइलों को आगे बढ़ाते हैं. बड़ी बात नहीं कि उनकी रूचि किसी ख़ास व्यक्ति या संस्थान को ठेका देने में होती है जबकि मंत्री और विभाग का झुकाव अपने पसंदीदा वेंडरों या ठेकेदारों की तरफ होता है. जब निदेशक मंत्रियों के मौखिक आदेश नहीं मानते या चहेती कंपनियों को टेंडर देने से मना करते हैं, तो उनके खिलाफ फाइलों में अड़ंगा लगाना या विभागीय जांच का दबाव बनना शुरू हो जाता है।

    रिम्स के भीतर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति, सीनियरिटी तय करने और प्रमोशन देने का अधिकार तकनीकी रूप से प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से होता है। इस मामले में भी निदेशक की अपनी पसंद होती है जबकि स्वास्थ्य मंत्री अपनी पसंद के डॉक्टरों को मलाईदार विभागों का प्रभार दिलाने या सीनियर डॉक्टरों को दरकिनार करने का दबाव बनाते हैं.

    कागजों पर रिम्स को एम्स (AIIMS) की तर्ज पर एक स्वायत्त संस्थान बनाया गया है, ताकि इसके निदेशक स्वतंत्र रूप से फैसले ले सकें। लेकिन धरातल पर, रिम्स की वित्तीय निर्भरता पूरी तरह राज्य के स्वास्थ्य विभाग पर है.

    रिम्स के नियम मंत्री को ‘अध्यक्ष’ की हैसियत से संस्थान का मालिक तो बनाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अस्पताल चलाने की जवाबदेही ‘निदेशक’ की होती है। अधिकारों का यह असंतुलन ही रिम्स को मंत्रियों का पसंदीदा राजनीतिक प्ले ग्राउंड बनाए रखता है।

    रिम्स का इतिहास महंगे चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भी भारी वित्तीय अनियमितताओं से भरा रहा है, जिसकी जांच सीबीआई (CBI), ईडी (ED), सीएजी (CAG) और सीआईडी (CID) तक ने की है.

    मधु कोड़ा सरकार के समय रिम्स और राज्य स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये का दवा और वेंटिलेटर खरीद घोटाला हुआ था। बाजार दर से 400% अधिक कीमत पर अनुपयोगी मशीनें खरीदी गईं। इसकी जांच CBI और ED ने की और तत्कालीन मंत्री की संपत्तियां भी जब्त हुईं.

    CAG ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में रिम्स डेंटल कॉलेज के लिए मशीनों और कुर्सियों की खरीद में भारी गबन पकड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित बजट से 400% अधिक की खरीद की गई, निविदा नियमों को ताक पर रखकर चहेते वेंडरों को काम दिया गया जिनके पते और फोन नंबर भी फर्जी पाए गए थे.

    रिम्स में करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और कैंसर विभाग की मशीनें (जैसे कोबाल्ट थेरेपी मशीन, सीटी स्कैन) सालों तक बिना इंस्टॉलेशन या बिना ऑपरेटर के धूल फांकती रहीं, जबकि मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में भेजा जाता रहा। इस पर हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई और सभी जरूरी मशीनें खरीदने और दुरुस्त करने का सख्त आदेश दिया है.

    रिम्स में आउटसोर्सिंग के जरिए सफाई और सुरक्षा का ठेका उत्तर प्रदेश की तीन कथित अयोग्य कंपनियों को देने का गंभीर मामला सामने आया है. इस वित्तीय गड़बड़ी को लेकर 24 जून 2026 को CID की टीम ने रिम्स में छापेमारी कर सारे दस्तावेज जब्त किए हैं। इसी विवाद के दबाव में तत्कालीन निदेशक को पद भी छोड़ना पड़ा।

    ऐसा भी नहीं कि रिम्स में ऐसे कारनामे किसी ख़ास स्वास्थ्य मंत्री या निदेशक के कार्यकाल में हुए हैं. शुरुआत से अबतक रिम्स काजल की कोठरी बना हुआ है और जिसने भी इसकी कमान संभाली उसका दामन दागदार हुआ ही है.

    लेकिन हमारे – आपके हिस्से का सवाल तो बस इतना है कि झारखण्ड बनने के बाद से अबतक बनी सरकारें राज्य में ऐसा एक अदद सरकारी अस्पताल भी खड़ा नहीं कर सकीं जिसपर सूबे का आम आदमी सुगमता से सस्ते और अच्छे इलाज का भरोसा कर सके. आखिर हमारे – आपके पैसे से सालाना करीब 400 करोड़ रूपये रिम्स को किस बात के लिए दिए जाते हैं? डायरेक्टर और मंत्री के बीच छीनाझपटी और इगो की लड़ाई के लिए तो बिलकुल नहीं? सरकार रिम्स 2 बनाने की तैयारी कर रही है. अबतक का ट्रैक रिकॉर्ड संकेत दे रहा है कि अगर हाकिमों का रवैया नहीं बदला तो यह नया संस्थान भी संसाधनों की छीनाझपटी और इगो की लड़ाई का नया केंद्र बनकर रह जाएगा और आम जनता के हिस्से में वही परेशानी और बेबसी आयेगी.

    क्या आपको नहीं लगता कि रिम्स को सही अर्थों में एक स्वायत्त – स्वतंत्र संस्थान बनाया जाना चाहिए और अनावश्यक हस्तक्षेप बंद होना चाहिए?

    क्या यह भी जरुरी नहीं लगता कि रिम्स के गठन से लेकर अबतक के तमाम टेंडर, खरीद, बहाली, एडमिशन और खर्च की बारीकी से जांच होनी चाहिए और दोषी पाये गए तमाम लोगों पर, चाहे वे जितने बड़े रसूखदार हों, सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    Lok Chetna

    Related Posts

    असम के बाजारों से लेकर रिलायंस मार्ट तक झारखण्ड के नेतरहाट की नाशपाती की धूम, महिला किसानों की आमदनी को मिला नया बूम

    September 1, 2026

    झारखंड में स्थानीय फिल्मों को मिले बढ़ावा, सीड फन्डिंग की हो व्यवस्था : असीम सिन्हा

    August 24, 2026

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    August 23, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    Top Posts

    कानपुर में छात्र का कथित पिस्टल के साथ वीडियो वायरल, पुलिस कार्रवाई की मांग

    August 15, 2026386

    ईडी की बड़ी रणनीति, रांची जोन के जेडी प्रभाकर प्रभात को मिला कोलकाता जोन का अतिरिक्त प्रभार

    May 8, 2026245

    डालटनगंज रूट की 14 पैसेंजर ट्रेनें रद्द, 16 एक्सप्रेस ट्रेनों का मार्ग बदला गया

    June 22, 2026197

    धनबाद में बिजली कटौती पर भड़के सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, बोले- सुधार नहीं हुआ तो डीवीसी के खिलाफ होगा बड़ा आंदोलन

    April 22, 2026172
    Don't Miss
    Jharkhand

    असम के बाजारों से लेकर रिलायंस मार्ट तक झारखण्ड के नेतरहाट की नाशपाती की धूम, महिला किसानों की आमदनी को मिला नया बूम

    By Siyasi KhabarSeptember 1, 20267

    Ranchi : नेतरहाट की पहाड़ियों में उगने वाली प्रीमियम गुणवत्ता की नाशपाती अब स्थानीय हाट-बाजारों…

    झारखंड में स्थानीय फिल्मों को मिले बढ़ावा, सीड फन्डिंग की हो व्यवस्था : असीम सिन्हा

    August 24, 2026

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    August 23, 2026

    स्त्री को देवी मत बनाईये, बस उसे उसके अधिकार दे दीजिये

    August 23, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest Political news from The Pulse of Politics.

    About Us

    Lok Chetna is a news portal committed to bringing impactful stories to the forefront. We focus on social issues, development and awareness to inform and inspire our community toward positive change.

    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp

    असम के बाजारों से लेकर रिलायंस मार्ट तक झारखण्ड के नेतरहाट की नाशपाती की धूम, महिला किसानों की आमदनी को मिला नया बूम

    September 1, 2026

    झारखंड में स्थानीय फिल्मों को मिले बढ़ावा, सीड फन्डिंग की हो व्यवस्था : असीम सिन्हा

    August 24, 2026

    संथाली सिनेमा उद्योग का अर्थशास्त्र : झारखण्ड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुकरणीय बिज़नेस मॉडल  

    August 23, 2026

    JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा खुलासा, बिंसिस निदेशक अरुण कुमार पांच दिन की रिमांड पर; कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप

    August 13, 2026
    Bihar

    तेजस्वी यादव का NDA सरकार को अल्टीमेटम, बोले- छात्रों को रिहा नहीं किया तो होगा बड़ा आंदोलन

    July 27, 2026

    बांकीपुर उपचुनाव: आरजेडी प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने दाखिल किया नामांकन, हलफनामे में बताई करोड़ों की संपत्ति

    July 10, 2026

    बिहार में EOU की बड़ी कार्रवाई: सिवान के उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड़ के 5 ठिकानों पर छापेमारी, आय से 201% अधिक संपत्ति का आरोप

    July 9, 2026

    भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: मां आज से आमरण अनशन पर, दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग तेज

    July 9, 2026
    © 2026 Lok Chetna. Developed & Hosted by Midhaxa Innovations
    • Home
    • Terms and Conditions
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.