रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले के बरकठा अंचल स्थित मौजा-बेरो कला की 117.68 एकड़ जमीन से जुड़े विवाद में 118 रैयतों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने फिलहाल विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देते हुए रैयतों की जमाबंदी रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकलपीठ ने लक्ष्मण कुमार दास एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। साथ ही राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
40 वर्ष पुरानी जमाबंदी रद्द करने का मामला
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, रवि कुमार, राहुल कमलेश और अंशुमन मिश्रा ने अदालत को बताया कि मौजा-बेरो कला (थाना संख्या 45, खाता संख्या 01) की 117.68 एकड़ जमीन पर पिछले लगभग 40 वर्षों से 118 रैयतों के नाम से जमाबंदी चल रही थी।
उन्होंने बताया कि बरही के अनुमंडल पदाधिकारी ने 27 अगस्त 2024 को आदेश जारी कर सभी 118 रैयतों की जमाबंदी रद्द कर दी। इसके बाद उसी जमीन की नई जमाबंदी एक निजी प्रतिवादी के नाम पर दर्ज कर दी गई, जिसे याचिकाकर्ताओं ने नियमों के विरुद्ध बताया।
1984 के आदेश का भी दिया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इस जमीन को लेकर पूर्व में भी विवाद हो चुका है। उस समय 24 जुलाई 1984 को उत्तर छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त ने निजी प्रतिवादी के दावे को खारिज करते हुए 118 रैयतों के पक्ष में फैसला सुनाया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि प्रमंडलीय आयुक्त के चार दशक पुराने आदेश और रैयतों के लंबे समय से चले आ रहे कब्जे को नजरअंदाज करते हुए एसडीओ ने जमाबंदी रद्द कर दी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
राज्य सरकार से छह सप्ताह में मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई तक विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने और जमाबंदी रद्द करने के आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी।

