रांची: देशभर में मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड सहित सभी राज्यों की पुलिस और संबंधित विभागों को ड्रग्स तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए 15 सूत्रीय टास्क सौंपा है। इसके तहत मार्च 2029 तक ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
यह निर्णय 9 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 9वीं एपेक्स लेवल एनसीओआरडी समिति की बैठक में लिया गया था। बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी, खपत और इसके वित्तीय नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभिन्न एजेंसियों और विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
बैठक के एजेंडे और प्रस्तावित रोडमैप की विस्तृत रिपोर्ट झारखंड की गृह सचिव वंदना दादेल और पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र को भेजी गई है। इसके आधार पर गृह विभाग ने एडीजी सीआईडी, एएनटीएफ, आईजी स्पेशल ब्रांच तथा सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक कार्रवाई कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
नेटवर्क से लेकर मनी ट्रेल तक होगी जांच
गृह मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार अब केवल ड्रग्स बरामदगी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। तस्करी के पूरे नेटवर्क की पहचान करते हुए इसके स्रोत, बिचौलियों, वितरण चैनलों और आर्थिक लेन-देन की जांच की जाएगी। सभी मामलों में मनी ट्रेल की पड़ताल को अनिवार्य बनाया जाएगा।
सिंथेटिक ड्रग्स और नई लैब तकनीकों पर विशेष निगरानी
तेजी से बढ़ रहे सिंथेटिक ड्रग्स के खतरे को देखते हुए रसायनों और उत्पादन तकनीकों की निगरानी के लिए समर्पित प्लेटफॉर्म विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से नई और उभरती रासायनिक संरचनाओं पर नजर रखी जाएगी तथा संबंधित उद्योगों को भी जागरूक किया जाएगा।
डेटा आधारित खुफिया प्रणाली होगी विकसित
ड्रग्स तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वस्तुओं की आवाजाही, लॉजिस्टिक नेटवर्क और भुगतान संबंधी सूचनाओं को एकीकृत करने वाली तकनीक आधारित खुफिया प्रणाली विकसित की जाएगी। इसमें सीमा शुल्क, विनिर्माण क्षेत्र और जीएसटी प्राधिकरणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
प्रत्येक जिले को बनाना होगा रोडमैप
निर्देश के अनुसार जिला प्रशासन, पुलिस और फॉरेंसिक विभागों को समन्वय स्थापित कर 31 मार्च 2026 तक जिला स्तर पर मादक पदार्थ नियंत्रण का विस्तृत रोडमैप तैयार करना होगा। इसके अलावा प्रत्येक राज्य और जिले को 10 प्रमुख ड्रग हॉटस्पॉट चिन्हित कर वहां केंद्रित कार्रवाई करनी होगी।
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बनेगा ड्रग फ्री जोन
सभी शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग फ्री क्षेत्र घोषित करने का निर्देश दिया गया है। परिसरों में जागरूकता अभियान, स्वैच्छिक स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग कार्यक्रम चलाए जाएंगे। नशे की लत से प्रभावित छात्रों की पहचान कर उनके पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने की योजना
युवा एवं खेल विभाग को ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई है, जहां नशे का खतरा अधिक है। उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर नशे से दूर रखना है।
जब्त ड्रग्स के विनष्टीकरण पर जोर
राज्यों को जब्त किए गए मादक पदार्थों के शीघ्र विनष्टीकरण के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने को कहा गया है। इसके लिए पुलिस नेतृत्व स्तर पर निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।
कई विभागों को मिली जिम्मेदारी
झारखंड पुलिस के अलावा राजस्व विभाग, औषधि विभाग, सामाजिक न्याय विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, डाक विभाग, शिक्षा विभाग, युवा एवं खेल विभाग, खुफिया ब्यूरो और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो सहित कई एजेंसियों को इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार पहले ही राज्य में ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एएनटीएफ को मजबूत बनाने और सूचना देने वालों के लिए पुरस्कार योजना लागू करने की घोषणा कर चुकी है। अब केंद्र सरकार के 15 सूत्रीय रोडमैप के बाद राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान और तेज होने की संभावना है।

