जमशेदपुर: झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद जमशेदपुर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिला प्रशासन ने कोषागार व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने स्पष्ट कहा है कि अब किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी का वेतन पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही जारी किया जाएगा।
वेतन भुगतान से पहले अनिवार्य होगा सत्यापन
उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक डीडीओ बिल की गहन जांच की जाए। संबंधित अधिकारी या कर्मचारी वास्तव में अपने विभाग में कार्यरत है या नहीं, इसकी पुष्टि करना अनिवार्य होगा। इसके लिए नाम, पदनाम, जन्म तिथि सहित सभी जरूरी विवरणों का मिलान ऑनलाइन रिकॉर्ड और सर्विस बुक से किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वेतन या मानदेय भुगतान केवल पे स्लिप या सर्विस बुक में दर्ज सत्यापित आंकड़ों के आधार पर ही किया जाए। साथ ही बैंक खाता संख्या का सत्यापन पासबुक या चेक के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।
कोषागार का औचक निरीक्षण
शनिवार को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कोषागार का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निकासी एवं भुगतान प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने कहा कि कोषागार जिले की वित्तीय व्यवस्था का केंद्र होता है, इसलिए यहां से होने वाली हर वित्तीय प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कोषागार पदाधिकारी को निर्देश दिया कि डीडीओ द्वारा प्रस्तुत बिल कोषागार संहिता के नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी पूरी तरह जांच की जाए।
वित्तीय प्रक्रियाओं की समीक्षा के निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने बुक ट्रांसफर, सब अलॉटमेंट, अनयूज्ड अलॉटमेंट और फ्रेश अलॉटमेंट से जुड़ी जानकारी ली। साथ ही जिले में संचालित पीएल खातों और सबहेड की विस्तृत जानकारी भी मांगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि जो राशि खर्च नहीं हो पाएगी, उसे संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर समय पर सरेंडर कराया जाए। इसके अलावा प्रत्येक सप्ताह एसी और डीसी विपत्रों के समायोजन तथा पीएल खातों की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए।
अधिकारियों की मौजूदगी
इस दौरान कोषागार पदाधिकारी सीताराम प्रसाद और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पंचानन उरांव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की इस सख्ती से वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

