नई दिल्ली: केंद्र सरकार डिजिटल स्पेस पर निगरानी को और सख्त बनाने की तैयारी में है। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधन के तहत अब सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि खबरें और करंट अफेयर्स साझा करने वाले आम यूजर्स भी दायरे में आ सकते हैं।

सरकार का उद्देश्य फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाना है, जो तेजी से सोशल मीडिया के जरिए फैलती हैं। प्रस्तावित बदलावों से डिजिटल कंटेंट की जवाबदेही को और मजबूत किया जाएगा।

यूजर्स की जिम्मेदारी बढ़ेगी

प्रस्ताव के अनुसार, जो यूजर्स सोशल मीडिया पर न्यूज या करंट अफेयर्स से जुड़ी सामग्री पोस्ट, शेयर या अपलोड करते हैं, उन्हें भी नियमों का पालन करना होगा। इसका मतलब है कि अब सिर्फ पब्लिशर ही नहीं, बल्कि सामान्य यूजर्स भी अपने द्वारा साझा की गई जानकारी के लिए जवाबदेह होंगे।

ऐसे में यूजर्स को किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और स्रोत की पुष्टि करनी होगी, अन्यथा उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

14 अप्रैल तक मांगे गए सुझाव

सरकार ने इस प्रस्ताव पर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इसके लिए 14 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया है। इसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

क्या होंगे नए प्रावधान

ड्राफ्ट के अनुसार, एक नया नियम जोड़ा जाएगा, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। उन्हें सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा, डेटा सुरक्षा से जुड़े मौजूदा प्रावधान भी लागू रहेंगे, जिससे यूजर्स की निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

निगरानी तंत्र होगा मजबूत

सरकार ने इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी के अधिकार क्षेत्र को भी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अब यह समिति न केवल शिकायतों पर, बल्कि मंत्रालय द्वारा भेजे गए मामलों पर भी कार्रवाई कर सकेगी। इससे डिजिटल कंटेंट की निगरानी और अधिक सख्त हो जाएगी।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस

जहां एक ओर सरकार इसे फेक न्यूज पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि अंतिम नियम किस रूप में लागू होते हैं और आम यूजर्स पर इसका कितना असर पड़ता है।

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