जमशेदपुर : टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में 29 मई से 4 जून तक उत्पादन पूरी तरह बंद रहने का असर अब आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में साफ दिखाई देने लगा है। टाटा मोटर्स के साथ कदमताल करते हुए टाटा कमिंस ने भी 1 और 2 जून को ब्लॉक क्लोजर तथा 30 मई और 3 जून को फ्लेक्सी ऑफ की घोषणा की है। दोनों प्रमुख कंपनियों में उत्पादन ठप होने से आदित्यपुर की सहायक औद्योगिक इकाइयों के सामने कामकाज का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
90 प्रतिशत उद्योग टाटा मोटर्स और कमिंस पर निर्भर
आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया का बड़ा हिस्सा टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर निर्भर है। यहां की लगभग 90 प्रतिशत कंपनियां इन दोनों कंपनियों को फोर्जिंग, कास्टिंग, मशीनिंग, रिम, नट-बोल्ट, रबर और फाइबर से जुड़े विभिन्न कलपुर्जों की आपूर्ति करती हैं।
पैरेंट कंपनियों में सात दिनों तक उत्पादन बंद रहने के कारण सहायक उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो गई है। इससे तैयार माल की सप्लाई लगभग ठप पड़ गई है। हालांकि गोविंदपुर स्थित स्टील स्ट्रिप्स व्हील्स कंपनी में फिलहाल कामकाज सामान्य रूप से जारी है।
2 लाख लोगों की आजीविका पर असर
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आई इस सुस्ती का सीधा असर क्षेत्र के हजारों श्रमिकों पर पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष श्रमिक प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा करीब 1.5 लाख अप्रत्यक्ष श्रमिक, दिहाड़ी मजदूर और परिवहन से जुड़े लोग भी इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं।
इस प्रकार करीब 2 लाख लोगों की आजीविका पर इस बंदी का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
10 से 15 प्रतिशत उद्योगों में पूरी तरह ठप हुआ काम
उद्यमी संगठन एसिया के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल ने कहा कि ब्लॉक क्लोजर के दौरान सभी इकाइयों में उत्पादन पूरी तरह बंद नहीं होता। इस अवधि में कई कंपनियां पुराने लंबित कार्यों को पूरा करती हैं और आवश्यक कलपुर्जों का सीमित उत्पादन जारी रखती हैं।
हालांकि उन्होंने बताया कि लगभग 10 से 15 प्रतिशत लघु उद्योग ऐसे हैं, जहां कामकाज पूरी तरह बंद हो जाता है और कर्मचारियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
उद्योग जगत के लिए चेतावनी : रूपेश कतरियार
उद्यमी संगठन इसरो के अध्यक्ष रूपेश कतरियार ने इस स्थिति को उद्योग जगत के लिए चेतावनी बताया है। उन्होंने कहा कि भले ही सभी कंपनियां पूरी तरह बंद नहीं होतीं, लेकिन मुख्य कंपनियों को आपूर्ति रुक जाने से सहायक उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत पहले से ही बढ़ी हुई है। ऐसे में बार-बार होने वाली बंदी उद्योगों और उद्यमियों के लिए चिंता का विषय है। यदि बाजार की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इसका असर रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

