रांची: झारखंड में शराब बिक्री को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग शराब दुकानों के लिए फूड लाइसेंस अनिवार्य करने की तैयारी में जुट गया है। इस संबंध में विभाग जल्द ही उत्पाद विभाग के सचिव को प्रस्ताव भेजने वाला है।

यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो राज्य में शराब बेचने वाले सभी दुकानदारों को फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य हो जाएगा। इससे शराब की बिक्री और गुणवत्ता पर सख्त निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।

नई उत्पाद नीति के तहत निजी हाथों में संचालन

झारखंड में नई उत्पाद नीति के तहत शराब दुकानों का संचालन निजी एजेंसियों को सौंपा गया है। टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से करीब 1300 दुकानों का संचालन निजी कंपनियों के जिम्मे है। अब टेंडर की अवधि पूरी होने के साथ विभाग नए बदलावों की तैयारी कर रहा है।

इसी क्रम में फूड लाइसेंस को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव प्रमुख रूप से शामिल किया गया है, ताकि नियमों को और सख्त किया जा सके।

अन्य राज्यों में पहले से लागू व्यवस्था

राज्य में अभी तक शराब दुकानों के लिए फूड लाइसेंस जरूरी नहीं है। केवल बार, रेस्टोरेंट और कुछ संस्थानों के लिए ही यह अनिवार्य है।

हालांकि देश के कई राज्यों में शराब को खाद्य श्रेणी में रखा गया है और वहां फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसी असमानता को खत्म करने के लिए झारखंड में भी यह कदम उठाया जा रहा है।

नकली और मिलावटी शराब पर लगेगी रोक

विशेषज्ञों का मानना है कि फूड लाइसेंस अनिवार्य होने से शराब की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। राज्य में कई बार नकली और मिलावटी शराब पकड़े जाने के मामले सामने आए हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई की कमी देखी गई है।

नए नियम लागू होने के बाद इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

लेबलिंग और पैकेजिंग पर भी सख्ती

नियमों के अनुसार सभी अल्कोहलिक पेय पदार्थ जैसे वाइन, बीयर, रम, फेनी, जीन, ब्रांडी और वोदका के लिए पैकेजिंग और लेबलिंग के सख्त प्रावधान लागू किए जाएंगे।

इसके तहत बोतलों पर उत्पाद से जुड़ी पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिसमें अल्कोहल की मात्रा और भंडारण से संबंधित निर्देश शामिल होंगे। इससे उपभोक्ताओं को पारदर्शी जानकारी मिल सकेगी और सुरक्षा मानकों में सुधार होगा।

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