नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी घोषणाएं करना और बिना जवाबदेही के उसका प्रचार करना सरकार की कार्यशैली बन चुकी है। उन्होंने स्मार्ट सिटी मिशन को इसका प्रमुख उदाहरण बताया।

स्मार्ट सिटी मिशन पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने संसद में 19 मार्च को पूछे गए अपने प्रश्न और सरकार के जवाब का हवाला देते हुए दावा किया कि स्मार्ट सिटी मिशन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। उन्होंने कहा कि यह योजना जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में विफल रही है।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि कोई भी शहर तब तक ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, जब तक वह अपने नागरिकों को साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराता।

‘धोखे से कम नहीं’ बताया मिशन

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस योजना को पूरे शहर के विकास के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने सवाल उठाया कि कितने शहर वास्तव में बदले, सफलता का मापदंड क्या रहा और लोगों के जीवन में क्या ठोस सुधार हुआ।

राहुल गांधी ने कहा कि इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला और केवल खर्च और परियोजनाओं के पूरे होने के आंकड़े प्रस्तुत किए गए।

सरकार का जवाब

राहुल गांधी के सवालों के जवाब में आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केंद्र सरकार ने 48,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

उन्होंने कहा कि 100 शहरों ने 47,458 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता का दावा किया है, जो कुल आवंटन का 99 प्रतिशत है। एक मार्च 2026 तक 46,326 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किया जा चुका है।

जमीनी हकीकत पर सवाल

राहुल गांधी ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। उन्होंने दूषित पानी, खुले सीवर, गिरते पुल और धंसती सड़कों जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना की विफलता को दर्शाता है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस बयान के बाद स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, वहीं सरकार अपने आंकड़ों के आधार पर इसे सफल योजना के रूप में पेश कर रही है।

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