कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका पर अदालत 15 जुलाई को सुनवाई करेगी। सांसद ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की जांच के दौरान पुलिस किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई, विशेषकर गिरफ्तारी, पर अंतरिम रोक लगाए।
वर्चुअल पूछताछ की अनुमति देने की मांग
महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में यह भी आग्रह किया है कि उन्हें पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ में शामिल होने की अनुमति दी जाए। मामले का उल्लेख किए जाने पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने 15 जुलाई को सुनवाई की बात कही और याचिकाकर्ता के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस तामील कराने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा विवाद?
याचिका की सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत को बताया कि हाल ही में नदिया जिले की एक निचली अदालत में पेशी के दौरान कुछ लोगों ने चेहरा ढककर उन पर अंडे फेंके और हमला किया था। इसके बाद सांसद ने सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी की थी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि जो लोग अपना चेहरा छिपाते हैं, उन्हें बुर्का पहन लेना चाहिए।
इस टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि इस बयान को नफरती भाषण के रूप में प्रस्तुत किया गया और यह अर्थ निकाला गया कि उन्होंने हिंदुओं के लिए यह टिप्पणी की है। इसी आधार पर उनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया।
गिरफ्तारी और सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस लगातार उन्हें व्यक्तिगत रूप से थाने में उपस्थित होने के लिए नोटिस भेज रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सांसद थाने जाती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी कारण उन्होंने अदालत से गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक और वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति देने की मांग की है।
अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा, जहां याचिका पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

