रांची : रांची में शुक्रवार सुबह से पेट्रोल पंपों पर अचानक भारी भीड़ देखने को मिली। पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों और सप्लाई को लेकर फैली आशंकाओं के बीच लोग बड़ी संख्या में ईंधन भरवाने पंपों पर पहुंच गए। शहर के कई इलाकों में बाइक, कार, ऑटो और छोटे व्यावसायिक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

लोगों की कोशिश सिर्फ इतनी थी कि किसी तरह उनकी गाड़ियों की टंकी फुल हो जाए। कई जगहों पर हालात ऐसे दिखे मानो ईंधन संकट गहरा गया हो।

कीमत बढ़ने के बाद बढ़ी चिंता

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। नई दरों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह बढ़ोतरी वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर है।

रांची में भी इसी खबर के बाद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं या सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका ने पंपों पर अचानक दबाव बढ़ा दिया।

सामान्य से ज्यादा ईंधन भरवाते दिखे लोग

कई जगह लोगों को रोजाना की जरूरत से ज्यादा पेट्रोल और डीजल भरवाते देखा गया। कुछ लोग डिब्बों और कंटेनरों में भी ईंधन लेने की कोशिश करते नजर आए। हालांकि तेल की उपलब्धता को लेकर कोई आधिकारिक संकट की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन अफवाहों और आशंकाओं ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

आम लोगों और वाहन चालकों पर असर

ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ निजी वाहन मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा। ऑटो चालक, टैक्सी संचालक, छोटे ट्रांसपोर्टर और रोजमर्रा की आवाजाही करने वाले लोग भी इसकी सीधी मार झेलेंगे।

वाहन चालकों का कहना है कि पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। अब पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने का असर धीरे-धीरे माल ढुलाई, किराया और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

अफवाह और पैनिक बाइंग बनी चुनौती

पिछले कुछ दिनों में झारखंड के कई इलाकों में ईंधन को लेकर अफरा-तफरी जैसी स्थिति देखने को मिली थी। कुछ स्थानों पर सप्लाई प्रभावित होने और पैनिक बाइंग के कारण लंबी कतारें लग गई थीं।

ऐसे हालात में प्रशासन और तेल कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अफवाहों पर नियंत्रण और सामान्य सप्लाई व्यवस्था बनाए रखने की होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने की प्रवृत्ति सामान्य वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

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