रांची : देशभर के 32 फर्जी संस्थानों की सूची जारी करते हुए University Grants Commission (यूजीसी) ने झारखंड के कथित ‘दक्ष विश्वविद्यालय’ को भी अवैध घोषित कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संस्थानों से प्राप्त डिग्रियां न तो सरकारी और निजी नौकरियों में मान्य होंगी और न ही उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए स्वीकार की जाएंगी।

यूजीसी के अनुसार, ये संस्थान बिना किसी वैधानिक मान्यता के स्वयं को विश्वविद्यालय बताकर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। आयोग ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर अवश्य जांच लें।

मौके पर नहीं मिला कोई विश्वविद्यालय

यूजीसी की सूची के अनुसार, ‘दक्ष विश्वविद्यालय’ का पता भास्कर पथ, न्यू पुनदाग, मसीबारी, रांची–834007 बताया गया है। हालांकि स्थानीय स्तर पर जांच में वहां ऐसा कोई विश्वविद्यालय संचालित होता नहीं मिला। आसपास के लोगों ने भी इस नाम के किसी संस्थान की जानकारी होने से इनकार किया।

ऑनलाइन खोज में विश्वविद्यालय के नाम से एक वेबसाइट जरूर दिखाई देती है, जिसमें विभिन्न कोर्स और डिग्री कार्यक्रमों की जानकारी दी गई है, लेकिन उसमें न तो कोई स्पष्ट संपर्क नंबर है और न ही प्रशासनिक ढांचे की ठोस जानकारी। इससे इसके फर्जी होने की आशंका और मजबूत होती है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

Ranchi University के पूर्व सिंडिकेट सदस्य डॉ. अटल पांडे ने कहा कि झारखंड में ‘दक्ष विश्वविद्यालय’ नाम का कोई मान्यता प्राप्त संस्थान नहीं है। यदि कोई संस्था विश्वविद्यालय के नाम पर छात्रों को भ्रमित कर रही है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

स्टेट यूनिवर्सिटी एसोसिएशन के पदाधिकारी डॉ. राजकुमार ने कहा कि फर्जी विश्वविद्यालय अक्सर आकर्षक विज्ञापनों, कम फीस और त्वरित डिग्री के झांसे में छात्रों को फंसाते हैं, जिससे बाद में उनका करियर खतरे में पड़ जाता है।

पूर्व कुलपति एस.एन. मुंडा ने भी कहा कि जागरूकता ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है। छात्रों को किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की पुष्टि जरूर करनी चाहिए।

यूजीसी की अपील

यूजीसी ने दोहराया है कि बिना मान्यता वाले किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से छात्रों का भविष्य संकट में पड़ सकता है। इसलिए नामांकन से पहले संस्थान की मान्यता की जांच करना बेहद जरूरी है।

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