रांची। झारखंड में मनरेगा योजना के तहत कार्यरत इंजीनियरों को पिछले नौ से दस महीनों से मानदेय नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। इस मुद्दे को लेकर झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार के समक्ष कड़ा विरोध जताया है।

मानदेय भुगतान नहीं होने से अभियंताओं की स्थिति बदतर

मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्यरत सहायक अभियंता और कनीय अभियंता पिछले कई महीनों से मानदेय से वंचित हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष महेश सोरेन ने इस मुद्दे को लेकर मनरेगा आयुक्त झारखंड को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि लगभग 9-10 महीनों से इंजीनियरों को वेतन नहीं मिला है, जिससे उनका पारिवारिक भरण-पोषण तक संभव नहीं हो पा रहा है।

काम पर प्रभाव: क्षेत्र भ्रमण और निगरानी पर भी पड़ा असर

संघ के अनुसार, इन अभियंताओं की मुख्य जिम्मेदारी मनरेगा योजनाओं की निगरानी और क्षेत्रीय भ्रमण करना है। लेकिन वित्तीय संकट के चलते वे योजनाओं का निरीक्षण भी नहीं कर पा रहे हैं। इसका सीधा असर योजना के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। कई अभियंता आवागमन और खानपान तक के लिए परेशान हैं।

मनरेगा फंड में प्रावधान होने के बावजूद अटका भुगतान

मनरेगा के मद में इंजीनियरों के मानदेय के लिए समुचित प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद भुगतान लटका हुआ है, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तकनीकी अमले को लगातार नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है। संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले कुछ महीनों में अनेक अभियंताओं ने अपनी आर्थिक परेशानी संघ को लिखित रूप में दी है।

संघ की सरकार से मांग: अविलंब हो मानदेय का भुगतान

राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि अविलंब सभी इंजीनियरों का लंबित मानदेय जारी किया जाए ताकि वे पुनः अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी दक्षता के साथ कर सकें। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो पूरे राज्य में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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